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Chanakya Niti: गुरु का ऋण कभी नहीं चुकाया जा सकता, जानें आचार्य चाणक्य के विचार

Sat, 06 Sep 2025 10:59 AM IST
श्वेता सिंह धर्म डेस्क, अमर उजाला

सार

Chanakya Niti Sutras: आज शिक्षक दिवस के इस खास मौके पर, आचार्य चाणक्य की शिक्षाओं और नीतियों को याद करना और उनसे सीख लेना अत्यंत महत्वपूर्ण है। जो मूल्य और ज्ञान उन्होंने अपने शिष्यों को दिए, वे आज भी हमारी ज़िंदगी में सफलता और समृद्धि के मार्ग प्रशस्त करते हैं।
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चाणक्य नीति - फोटो : amar ujala
Chanakya Niti sutras: आचार्य चाणक्य न केवल एक महान राजनीतिज्ञ और कूटनीतिज्ञ थे, बल्कि वे एक उत्कृष्ट शिक्षक के रूप में भी जाने जाते हैं। उनकी दूरदर्शी नीतियों और मार्गदर्शन की मदद से एक सामान्य बालक चंद्रगुप्त मौर्य ने मगध का चक्रवर्ती सम्राट बनने का इतिहास रचा। नंदवंश के पतन के बाद, चाणक्य ने अपने गुरु रूप में चंद्रगुप्त का नेतृत्व करते हुए भारत के महानतम सम्राटों में से एक के रूप में उनकी सफलता सुनिश्चित की।
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आचार्य चाणक्य की शिक्षाओं और नीतियों को याद करना और उनसे सीख लेना अत्यंत महत्वपूर्ण है। जो मूल्य और ज्ञान उन्होंने अपने शिष्यों को दिए, वे आज भी हमारी ज़िंदगी में सफलता और समृद्धि के मार्ग प्रशस्त करते हैं। आइए, चाणक्य की अमूल्य नीतियों को अपनाकर हम अपने जीवन को और बेहतर बनाने का संकल्प लें।
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चाणक्य के अनुसार हर व्यक्ति को अपनी ताकत और सीमाओं को पहचानना बहुत जरूरी है। - फोटो : अमर उजाला
आचार्य चाणक्य के अनुसार  शिक्षक का महत्व

एकमेवाक्षरं यस्तु गुरुः शिष्यं प्रबोधयेत् ।
पृथिव्यां नास्ति तद्द्रव्यं यद् दत्त्वा चाऽनृणी भवेत् ।।

 

इस श्लोक में आचार्य चाणक्य यह कहते हैं कि जिसने भी हमें ज्ञान दिया है, चाहे वह केवल एक अक्षर ही क्यों न हो, वह हमारे लिए गुरु के समान होता है। ऐसे गुरु का ऋण इस पृथ्वी पर चुकाया नहीं जा सकता। इसलिए हमें अपने गुरु, माता-पिता और उन सभी लोगों का सम्मान करना चाहिए जिन्होंने हमारे जीवन को दिशा दी है और हमें योग्य बनाया है। उनके चरण स्पर्श कर आशीर्वाद लेना चाहिए और सदैव उनके प्रति श्रद्धा और आभार की भावना रखनी चाहिए। यही सच्चा संस्कार और कर्तव्य है।

 
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जो विद्यार्थी सिर्फ आराम और सुख की इच्छा रखते हैं, वे सच्चे अर्थों में विद्या प्राप्त नहीं कर सकते। - फोटो : freepik
आचार्य चाणक्य के अनुसार विद्यार्थी कैसे होने चाहिए 
सुखार्थी चेत् त्यजेद्विद्यां त्यजेद्विद्यां विद्यार्थी चेत् त्यजेत्सुखम्।
सुखार्थिनः कुतो विद्या कुतो विद्यार्थिनः सुखम् ।।  
 
चाणक्य नीति के इस श्लोक में आचार्य चाणक्य यह स्पष्ट करते हैं कि जो विद्यार्थी सिर्फ आराम और सुख की इच्छा रखते हैं, वे सच्चे अर्थों में विद्या प्राप्त नहीं कर सकते। ऐसे लोगों को विद्या का त्याग कर देना चाहिए, क्योंकि ज्ञान प्राप्ति का मार्ग आसान नहीं होता। वहीं, जो विद्यार्थी वास्तव में शिक्षा प्राप्त करना चाहते हैं, उन्हें सुख-सुविधाओं की चिंता छोड़कर पूरी निष्ठा और परिश्रम से अध्ययन करना चाहिए। प्रारंभ में यह मार्ग कठिन जरूर होता है, लेकिन जो विद्यार्थी इन कठिनाइयों का डटकर सामना करते हैं, वे अंततः सफलता और सम्मान प्राप्त करते हैं।

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चाणक्य की नीति में कहा गया है कि सफलता उन्हीं लोगों को मिलती है जो समय की सही समझ रखते हैं। - फोटो : freepik
आचार्य चाणक्य की अन्य शिक्षाएं 
  • चाणक्य की नीति में कहा गया है कि सफलता उन्हीं लोगों को मिलती है जो समय की सही समझ रखते हैं। जब सुख के दिन होते हैं तो अच्छे कार्यों को जारी रखना चाहिए, और जब मुश्किल समय आता है तो धैर्य के साथ सही काम करते रहना चाहिए।
  • चाणक्य के अनुसार हर व्यक्ति को अपनी ताकत और सीमाओं को पहचानना बहुत जरूरी है। हमें यह समझना चाहिए कि हम किन कामों को अच्छे से कर सकते हैं। अगर हम अपनी क्षमता से ज्यादा कुछ करने की कोशिश करेंगे तो असफलता निश्चित है।
  • आचार्य चाणक्य के अनुसार यह भी जानना जरूरी है कि हमारे सच्चे दोस्त कौन हैं और कौन हमारे दुश्मन। मित्रों के रूप में छुपे हुए शत्रुओं को पहचानना आवश्यक है। साथ ही, सच्चे मित्रों की मदद से ही हम अपने लक्ष्यों को हासिल कर सकते हैं।
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कई बार शत्रु दोस्त के रूप में छिपे होते हैं, इसलिए उनकी पहचान करना जरूरी है। - फोटो : amar ujala
  • हर व्यक्ति को अपनी आय और खर्च का ठीक से पता होना चाहिए। जो लोग अपनी आमदनी से ज्यादा खर्च करते हैं, उन्हें अक्सर आर्थिक परेशानियों का सामना करना पड़ता है। इसलिए, धन की स्थिरता और सुख पाने के लिए कभी भी अपनी आय से ज्यादा खर्च नहीं करना चाहिए।
  • आचार्य चाणक्य कहते हैं कि व्यक्ति को हमेशा दूसरों की गलतियों से सीखना चाहिए। खुद पर बार-बार गलतियाँ करने से न केवल समय और संसाधन बर्बाद होते हैं, बल्कि हमारी ज़िंदगी भी कठिन हो सकती है। इसलिए अनुभव से सीखना और समझदारी से कदम बढ़ाना जरूरी है।
  • व्यक्ति को इस बात का भी स्पष्ट ज्ञान होना चाहिए कि आपके असली दोस्त कौन हैं और शत्रु कौन। कई बार शत्रु दोस्त के रूप में छिपे होते हैं, इसलिए उनकी पहचान करना जरूरी है। साथ ही, सच्चे मित्रों की पहचान भी महत्वपूर्ण है क्योंकि उनकी मदद से ही हम जीवन में सफलता पा सकते हैं।
  • आचार्य चाणक्य ने अपने नीति सूत्र में इस बात का भी उल्लेख किया है जिस जगह भी आप काम कर रहे हैं, उस जगह की पूरी जानकारी होना आवश्यक है। व्यक्ति को यह समझना चाहिए कि आपका प्रबंधक, कंपनी या बॉस आपसे क्या उम्मीद रखता है। किसी भी व्यक्ति को हमेशा ऐसे काम करने चाहिए जो संगठन के हित में हों और जिससे संस्थान को लाभ हो।


डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): यहां दी गई जानकारी सामान्य मान्यताओं, ज्योतिष, पंचांग, धार्मिक ग्रंथों आदि पर आधारित है। यहां दी गई सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है।
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