देवउठनी एकादशी 31 अक्टूबर को है। शास्त्रों के अनुसार देवउठनी एकादशी के बाद ही सभी तरह के शुभ कार्य शुरू किये जाते हैं, लेकिन इस बार भगवान के जागने के 18 दिन बाद ही कोई शुभ कार्य किए जा सकता है। इसका कारण ग्रहों का चाल है। दरअसल देवशयनी एकादशी से देवउठनी एकादशी तक यानी चार महीने भगवान विष्णु शयनकाल की अवस्था में होते हैं और इस दौरान कोई शुभ कार्य नहीं किया जाता है।
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दरअसल देवउठनी एकादशी के दिन तुलसी विवाह के साथ ही सभी शुभ कार्य शुरू हो जाते है, लेकिन इस बार मुहूर्त देरी से शुरू होने की वजह गुरु व शुक्र ग्रहों का अस्त रहना है। ये दोनों ग्रह विवाह के कारक ग्रह हैं। गुरु ग्रह 10 नवंबर को दोबारा उदय होंगे।
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सूर्य के 17 नवंबर को वृश्चिक राशि में प्रवेश के बाद ही 19 नवंबर से शुरू होकर 12 दिसंबर तक वैवाहिक मुहूर्त रहेगा। दो माह में कुल 15 दिन ही शुभ मुहूर्त रहेंगे।
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इसके बाद वर्ष 2018 में मकर संक्रांति के बाद विवाह मुहूर्त प्रारंभ होंगे जो मार्च में होलाष्टक प्रारंभ होने तक रहेंगे। 23 नवंबर को विवाह पंचमी है। इस दिन को विवाह के लिए अति शुभ माना गया है।
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इसी तरह 25 नवंबर को त्रिपुष्कर योग रहेगा जबकि 28 और 30 नवंबर के मुहूर्त भी विशेष शुभ रहेंगे। दोनों दिन सूर्यास्त से शुरू होकर रात तक सर्वार्थ सिद्धि योग रहेगा।