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धीरे-धीरे मृत्यु की ओर बढ़ रहा है हमारा सूरज, जानिए क्या कहता है विज्ञान

Sat, 12 Sep 2015 02:28 PM IST
डॉ. भगवत शरण
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हम समर्थ हो स्वस्थ हों, यह ठीक है, पर आज या कल नहीं, परसों अथवा उसके बाद किसी दिन मृत्यु का वरण तो करना ही पड़ेगा। सूर्य जैसी समर्थ शक्ति और प्रकाशपुंज और धरती समेत विभिन्न ग्रह नक्षत्रों पर जीवन और गति के सूत्रधार के अवसान की रूपरेखा भी तैयार है। फिर हमारी तो हस्ती ही क्या है?
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धीरे-धीरे मृत्यु की ओर बढ़ रहा है हमारा सूरज, जान‌िए क्या कहता है व‌िज्ञान

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अपने सूर्य का भूत, वर्तमान और भविष्य जानने के लिए खगोलवेत्ताओं ने गहरे अनुसंधान किए हैं। इस संदर्भ में जार्ज गेमो, एडिंगटन, फीडलर, हेनबेधे, फान वित्सकर के निष्कर्षों को अधिक प्रामाणिक माना गया है।
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तब सूर्य और पृथ्वी पर नीरवता भरी मृत्यु का साम्राज्य छाया रहेगा। वैसे तो मनुष्य को शतायु कहा गया है पर वर्तमान परिस्थितियों में कौन उतने समय तक जी पाता है।

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इस तरह देखें तो सूर्य की आयु लगभग 500 करोड़ वर्ष है। उसमें जो बदलाव आए हैं, उससे धरती पर भी भारी परिवर्तन हुए हैं। इन परिवर्तनों ने मनुष्य के मानसिक स्तर को खासतौर पर प्रभावित किया है। मनुष्य के चिंतन और उत्साह का विस्तार तो पिछले दिनों बहुत हुआ, सौर हलचलों से उसका स्तर और स्वरूप भी बहुत प्रभावित हुआ है।
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ठंडे होते चलने पर नक्षत्रों पर रंग लाल हो जाता है। जार्ज गेमों की मानें तो अपना सूर्य भी भविष्य में लाल दानव की तरह दिखाई देगा। इसके बाद बूढ़ा सूर्य समझना आरंभ करेगा। वृद्ध मनुष्य जिस तरह कुरूप और कुम्हलाए रह जाते हैं, वैसे ही सूर्य की भी अपनी अवस्था होगी। वह भी अपनी दशा को बदलेगा।
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वह एक कठोर प्लाज्मा पिण्ड की शक्ल में जा पहुंचेगा। घनत्व हमारे पानी की तुलना में पच्चीस लाख गुना अधिक होगा। सूरज सिकुड़ते-सिकुड़ते पृथ्वी से भी छोटा रह जाएगा। उस स्थिति में पृथ्वी निरन्तर ठंडी होते-होते शून्य में 325 फारनहाइट से नीची स्थिति में चली जाएगी।
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तब सूर्य और पृथ्वी पर नीरवता भरी मृत्यु का साम्राज्य छाया रहेगा। वैसे तो मनुष्य को शतायु कहा गया है पर वर्तमान परिस्थितियों में कौन उतने समय तक जी पाता है।
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