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क्यों है मूषक गणेश जी का वाहन? इसमें छिपी हैं जीवन की 5 सीख

Sun, 06 Sep 2026 04:18 PM IST
श्वेता सिंह धर्म डेस्क, अमर उजाला

सार

भगवान गणेश का मूषक सिर्फ उनका वाहन नहीं, बल्कि जीवन की कई गहरी सीखों का प्रतीक माना जाता है। इससे इच्छाओं पर नियंत्रण, मेहनत, साहस और बुद्धि के संतुलन जैसे महत्वपूर्ण संदेश मिलते हैं।
 
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मूषक से लें जीवन की सीख - फोटो : amar ujala

भगवान गणेश को बुद्धि, विवेक और विघ्नहर्ता के रूप में पूजा जाता है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि गणेश जी ने मूषक को ही अपना वाहन क्यों बनाया? धार्मिक मान्यताओं में मूषक को मनुष्य की चंचल इच्छाओं, लालच और भटकते मन का प्रतीक माना जाता है। वहीं गणेश जी बुद्धि और विवेक के प्रतीक हैं। इसलिए गणेश जी का मूषक पर सवार होना इस बात का संदेश देता है कि बुद्धि और विवेक से इच्छाओं व मन पर नियंत्रण पाया जा सकता है। गणेश जी का मूषक केवल उनका वाहन नहीं माना जाता, बल्कि इससे जीवन से जुड़ी कई महत्वपूर्ण सीख भी मिलती हैं। आइए जानते हैं इनका क्या अर्थ है।
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किसी व्यक्ति की क्षमता उसकी कद-काठी या हैसियत से तय नहीं होती। - फोटो : amar ujala

छोटा होना कमजोरी नहीं है
मूषक आकार में छोटा होता है, लेकिन गणेश जी का वाहन होने के कारण यह संदेश देता है कि किसी व्यक्ति की क्षमता उसकी कद-काठी या हैसियत से तय नहीं होती। सफलता के लिए आत्मविश्वास, सही सोच और लगातार प्रयास जरूरी हैं। इसलिए अपनी क्षमताओं को कम न आंकें और विनम्रता के साथ अपने लक्ष्य की ओर बढ़ते रहें।

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लगातार मेहनत से मिलती है सफलता - फोटो : freepik

लगातार मेहनत से मिलती है सफलता
मूषक को लगातार सक्रिय रहने वाला जीव माना जाता है। इससे यह सीख मिलती है कि बड़े लक्ष्य एक दिन में हासिल नहीं होते। रोज किए गए छोटे-छोटे प्रयास समय के साथ बड़ी उपलब्धि में बदल सकते हैं। इसलिए सफलता के रास्ते में गति कम हो सकती है, लेकिन मेहनत और लगन नहीं रुकनी चाहिए।

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जरूरत और लालच के बीच अंतर समझकर जीवन में संतुलन बनाए रखना जरूरी है। - फोटो : Money Spent

इच्छाओं पर नियंत्रण क्यों जरूरी है?
मूषक को कई धार्मिक व्याख्याओं में इच्छाओं और लालच का प्रतीक माना जाता है। गणेश जी का उस पर सवार होना यह संदेश देता है कि इंसान को अपनी इच्छाओं का गुलाम नहीं बनना चाहिए। जरूरत और लालच के बीच अंतर समझकर जीवन में संतुलन बनाए रखना जरूरी है।

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जीवन की मुश्किल परिस्थितियों को अंत नहीं, बल्कि नई शुरुआत का अवसर समझना चाहिए। - फोटो : Amar Ujala

नकारात्मकता को सकारात्मकता में बदला जा सकता है
मूषक को नुकसान और विनाश से भी जोड़कर देखा जाता है, क्योंकि वह अनाज और फसलों को नुकसान पहुंचा सकता है। लेकिन गणेश जी के साथ उसका संबंध एक अलग संदेश देता है। नकारात्मक ऊर्जा और परिस्थितियों को सही दिशा देकर सकारात्मक परिणाम में बदला जा सकता है। जीवन की मुश्किल परिस्थितियों को अंत नहीं, बल्कि नई शुरुआत का अवसर समझना चाहिए।

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डर के कारण सही अवसर को हाथ से नहीं जाने देना चाहिए। - फोटो : freepik

बुद्धि के साथ साहस भी जरूरी
सही फैसला लेना जितना जरूरी है, उस फैसले पर आगे बढ़ने का साहस भी उतना ही महत्वपूर्ण है। गणेश जी की बुद्धि और मूषक के निर्भीक स्वभाव को साथ रखकर देखें तो संदेश मिलता है कि सफलता के लिए सोच में विवेक और कदमों में साहस होना चाहिए। डर के कारण सही अवसर को हाथ से नहीं जाने देना चाहिए।

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मन को नियंत्रित करना सीखें - फोटो : अमर उजाला / एजेंसी

मन को नियंत्रित करना सीखें
मूषक को मन की चंचलता और भटकती इच्छाओं का प्रतीक भी माना जाता है। गणेश जी का उस पर नियंत्रण यह समझाता है कि अगर मन और इच्छाएं नियंत्रण में रहें तो व्यक्ति बेहतर निर्णय ले सकता है। बिना सोचे-समझे लिए गए फैसले परेशानी बढ़ा सकते हैं, जबकि बुद्धि और विवेक से लिया गया निर्णय सही दिशा दिखा सकता है।

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गणेश जी के मूषक से क्या सीख मिलती है? - फोटो : amar ujala
गणेश जी के मूषक से क्या सीख मिलती है?
गणेश जी का मूषक हमें सिखाता है कि इच्छाओं पर नियंत्रण, लगातार मेहनत, आत्मविश्वास, साहस और बुद्धि जीवन में सफलता के लिए महत्वपूर्ण हैं। इसका सबसे बड़ा संदेश यही है कि जब इंसान अपने मन और इच्छाओं को सही दिशा देना सीख जाता है, तो मुश्किल रास्ते भी आसान होने लगते हैं।

डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): यहां दी गई जानकारी सामान्य मान्यताओं, ज्योतिष, पंचांग, धार्मिक ग्रंथों आदि पर आधारित है। यहां दी गई सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है। 
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