अपनी आत्मकथा'योगी कथामृत ' में शरीर, मन व आत्मा के सुसंगत विकास के लिए उन्होंने क्रिया योग प्रविधि की मुख्य विशेषताओं का वर्णन किया है। मनमोहक शैली में लिखी गई इस पुस्तक में ऐसे वैश्विक सत्य हैं,जो हर युग, हर राष्ट्र,हर पृष्ठभूमि से आए व्यक्ति के लिए उपयुक्त हैं। परमहंस योगानंद द्वारा बताई गई ध्यान की इन प्रविधियों का पूरी श्रद्धा और नियम से अभ्यास कर साधक उस आत्म साक्षात्कार के योग्य हो जाता है, जिसकी चर्चा संसार के सभी मुख्य धर्मों में की गई है। योगानंद जी ने शरीर , मन और आत्मा के संतुलित विकास पर बल दिया है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि कुछ शारीरिक व्यायाम केवल योग नहीं हैं, अपितु इसका अंतिम लक्ष्य है - ईश्वर के साथ मिलना।