किसी भी व्यक्ति के लिए आज के दौर में छोटी से छोटी आवश्यकता के लिए धन की जरूरत होती है। आज के भौतिकवादी समय में तो धन का महत्व और भी ज्यादा बढ़ गया है। आचार्य चाणक्य ने भी नीतिशास्त्र में धन से संबंधित महत्वपूर्ण बातों का जिक्र किया है। आचार्य चाणक्य अर्थशास्त्र के मर्मज्ञ थे, इसलिए मनुष्य के जीवन में वे धन की महत्वता को भलिभांति समझते थे। चाणक्य के अनुसार जीवन को सरल और सुगम बनाने के लिए धन आवश्यक होता है, परंतु चाणक्य कहते हैं कि कुछ धन ऐसा भी होता है जो बहुत ही जल्दी नष्ट हो जाता है।