जापान के एक संत को जब ज्ञान प्राप्त हुआ या कहें जब वे निंद जागे, वह हंसने लगे और जीवनभर हंसते ही रहे। वह गांव - गांव जाते और हंसते। यही नहीं यह संत बीच बाजार में भी खड़े होकर हंसने लगते। कुछ याद आया इस संत का नाम।
विज्ञापन
2 of 5
जापान के लोग इन्हें हंसता हुआ बुद्ध कहते थे यानी लाफिंग बुद्धा। वैसे इनका नाम था होतई। लगातार हंसने के कारण होतई का नाम दूर दूर तक फैल गया। लोग उनकी प्रतीक्षा करने लगे। उनका कोई उपदेश नहीं था, बस वे बीच बाजार में खड़े होकर हंसने लग जाते और भीड़ भी उनके साथ हंसने लगती।
विज्ञापन
3 of 5
होतई से जब लोग कुछ और जानने सा समझने की जिद करते तो होतई सिर्फ इतना ही कहते कि मेरे पास कुछ भी बताने के लिए नहीं हैं। तुम लोग बेमतलब ही रोत रहते हो। तुम लोगों को एक मूर्ख की जरूरत हैं, जिस पर तुम सब हंस सको। उनका कहना था कि तुम लोग जी भर के हंसो।
4 of 5
लाफिंग बुद्धा का मानना था कि रोना या शोर मचाना व्यक्तिगत समस्या हैं। पूरी दुनिया हंस रही हैं। यहां तक कि चांद, तारें, पक्षी, फूल, पौधे सभी हंस रहे हैं और तुम रोएं चले जा रहे हो।
ये कभी रूके नहीं, इनका घूमना जारी रहा। ऐसा माना जाता है कि उन्होंने पूरे जापान को हंसाया। उनके साथ रहकर लोग हंसने लगे। धीरे धीरे लोगों को अहसास हुआ कि बिना कारण के भी हंस सकते हैं और खुश हो सकते हैं।