2.
गोस्वामी तुलसीदास जी ने कहा है कि —
सेवक सठ नृप कुपन कुनारी,
कपटी मित्र सूल समचारी।
सखा सोच त्यागहु बल मोरें,
सब बिधि घटब काज में तौरें।।
अर्थात् मूर्ख नौकर, कपटी राजा, चरित्रहीन नारी और दुष्ट मित्र उस तीर के समान होते हैं, जो चुभने पर सिर्फ और सिर्फ कष्ट देता है, इसलिए ऐसे लोगों से दोस्ती करने की भूल न करें।