घर में शादी का माहौल था। प्रिया और उसकी सहेलियों ने घर को दुल्हन की तरह सजा दिया था। आखिर उनकी सबसे प्रिय सहेली सिमरन की शादी जो थी। सिमरन के सभी रिश्तेदार आए हुए थे। उसमें उसकी एक चाची भी थीं। चाची सिमरन के साथ लॉन में बैठी प्रिया और उसकी दोस्तों को बच्चों के साथ नाचती देख रही थीं। तभी बच्चे एक दूसरे के ऊपर पानी डालने लगे। सारे बड़े किनारे हो गए, लेकिन प्रिया बच्चों के साथ बच्ची बनकर पानी में भीगती रही और बच्चों को भी खूब भिगोया। चाची जी बोलीं, सिमरन, यह क्या है! समझाओ अपनी दोस्त को। अब वह बड़ी हो गई है।
शादी का घर है और कितने सारे मेहमान इकट्ठा हैं। कोई देखेगा, तो क्या कहेगा? वह कम से कम अपनी उम्र का तो लिहाज करे। सिमरन ने चाची जी की तरफ घूरकर देखा और कहने लगी, चाची जी, दो साल पहले एक्सिडेंट में मेरा चेहरा पूरा खराब हो गया था। तेरह सर्जरी हुई थी मेरी, तब देखने लायक चेहरा बन पाया था। सब कहते थे कि अब इससे कोई शादी नहीं करेगा। आपको पता है, वहीं अस्पताल में प्रिया से मेरी पहली बार मुलाकात हुई थी।
वहां लोग मेरे चेहरे से डर जाते थे, या देखकर मुंह फेर लेते थे, लेकिन प्रिया ने मुझसे कहा था, तुम बहुत खूबसूरत हो। मैं जानती थी कि मैं खूबसूरत नहीं हूं, न ही अब कभी बन सकती हूं। पर जाने क्यों, उसके एक वाक्य से मेरा फिर से जीने का मन कर रहा था। वह मुझसे कहती थी, तुम जिस तरह से चाहो, जी सकती हो। खुलकर मस्ती कर सकती हो। पता है चाची, प्रिया बोलती थी कि अब जो भी तुम्हें पसंद करेगा, तुम निश्चिंत होकर उसे हां कह सकती हो, क्योंकि वह तुम्हारे चेहरे को देखकर नहीं, बल्कि तुम्हें पसंद करेगा, जैसी तुम हो। मेरे होने वाले पति अमित ऐसे ही हैं। उन्हें मुझमें सबसे ज्यादा पसंद यही है कि मैं दुनिया के बारे में नहीं सोचती। लेकिन मैं पहले ऐसी बिल्कुल नहीं थी। यह चीज मेरी सबसे अच्छी दोस्त प्रिया ने मुझे सिखाई है।
अमर उजाला के हरियाली और रास्ता पन्ने से साभार