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Gita Jayanti 2024: जीवन को सरल बनाती हैं गीता में लिखी ये पांच बातें, आप भी करें इनका पालन

Mon, 02 Dec 2024 03:07 PM IST
मेघा कुमारी धर्म डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

Gita Jayanti 2024: पंचांग के अनुसार मार्गशीर्ष महीने के शुक्ल पक्ष की एकादशी को गीता जयंती मनाई जाती है। इस साल 11 दिसंबर 2024 को गीता जयंती है। 
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गीता जयंती 2024 - फोटो : Amar Ujala
Gita Jayanti 2024: पंचांग के अनुसार मार्गशीर्ष महीने के शुक्ल पक्ष की एकादशी को गीता जयंती मनाई जाती है। इस साल 11 दिसंबर 2024 को गीता जयंती है। इस दिन भगवान श्रीकृष्ण ने अर्जुन को भगवद्गीता का ज्ञान प्रदान किया था। यह वह समय था, जब अर्जुन के कदम महाभारत युद्ध के लिए डगमगाने लगे थे। मान्यता है कि भगवान कृष्ण के उपदेशों को सुनकर ही अर्जुन अपने लक्ष्य की ओर अग्रसर हुए थे।

हिंदू धर्म में गीता को पवित्र ग्रंथ माना गया है, जिसका पाठ करने पर मनुष्य की तमाम समस्याओं का निवारण होता है। कहते हैं कि गीता में आत्मा, परमात्मा, भक्ति, कर्म और जीवन से जुड़े सभी विषयों का उल्लेख है। इन उपदेशों का अध्ययन करने से मनुष्य का जीवन सरल और सुखी बनता है। ऐसे में आइए इन उपदेशों के बारे में जानते हैं।
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गीता जयंती 2024 - फोटो : freepik
कर्म करना
भगवान कृष्ण के अनुसार मनुष्य को फल की इच्छा छोड़कर कर्म करना चाहिए। उनका मानना है कि यदि फल की कामना करे बगैर कार्य किए जाए, तो परिणाम अक्सर हक में आते हैं। 
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गीता जयंती 2024 - फोटो : freepik
मन पर काबू
भगवान कृष्ण के अनुसार मनुष्य का मन उसकी समस्याओं का कारण है। इसलिए हमेशा मन पर नियंत्रण रखना चाहिए। इससे लक्ष्यों को हासिल करने में मदद मिलती है। 

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गीता जयंती 2024 - फोटो : freepik
क्रोध पर नियंत्रण 
क्रोध असफलता का कारण बनता है। कई बार मनचाहे परिणाम प्राप्त न होने पर मन में क्रोध व ईर्ष्या की भावना पनपने लगती हैं। भगवान श्रीकृष्ण के अनुसार यह भावना हमेशा कार्य में बाधा उत्पन्न करती हैं। इसलिए इंसान को क्रोध करने से बचना चाहिए।
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गीता जयंती 2024 - फोटो : freepik
अभ्यास करना
भगवान कृष्ण के अनुसार जीवन में सफलता हासिल करने से पहले कई असफलताओं का सामना करना पड़ता है। इसलिए हमेशा व्यक्ति को अभ्यास करते रहना चाहिए। इससे ज्ञान में वृद्धि और असंभव कार्य भी संभव होते हैं।
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गीता जयंती 2024 - फोटो : freepik
आत्म सम्मान बनाएं रखें 
गीता के अनुसार इस पूरे संसार में कोई भी आपको खुद से बेहतर नहीं जान सकता। इसलिए समय-समय पर मनुष्य को स्वयं का मूल्यांकन करना चाहिए। 
 
डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): ये लेख लोक मान्यताओं पर आधारित है। यहां दी गई सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है। 
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