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Geeta Jayanti 2024: जीवन सरल बना देंगी गीता में लिखी ये 4 बातें, आज ही से करें इनका पालन

Sat, 07 Dec 2024 12:31 PM IST
शिखर बरनवाल धर्म डेस्क, अमर उजाला

सार

श्रीमद्भगवद्गीता में लिखी सभी बातें आज भी युवाओं को आगे बढ़ने की प्रेरणा देती हैं। साथ ही विपरीत परिस्थितियों में मनुष्य के काम आती हैं। गीता के ज्ञान की सभी लोग ने अपने-अपने तरीके से व्याख्या करते हैं। आइए इसी के बारे में विस्तार से जानते हैं।
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रणभूमि में अर्जुन और कृष्ण - फोटो : adobe stock
Geeta Updesh: श्रीमद्भगवद्गीता, भगवान श्रीकृष्ण द्वारा अर्जुन को दिए गए उपदेशों का संग्रह है, जो जीवन के हर पहलू पर मार्गदर्शन प्रदान करता है। इस साल 11 दिसंबर 2024 को गीता जयंती है।
इस खास अवसर पर हमें अपने जीवन में एक बड़ा संकल्प करना चाहिए और गीता के इन मूल्यों और सिद्धांतों को अपनाकर अपने जीवन को अधिक सरल और सार्थक बना सकते हैं। भगवद् गीता में ऐसी कई बातें बताई गई हैं जो हमारे जीवन के लिए सार्थक साबित हो सकती है। उदाहरण के लिए भगवद् गीता में बताया गया है कि हमें कर्म करते रहना चाहिए, और फल की चिंता नहीं करनी चाहिए, सब कुछ ईश्वर की इच्छा से होता है। गीता के इन मूल्यों को अपनाकर हम न केवल अपना व्यक्तित्व सुधार सकते हैं, बल्कि अपने जीवन को भी सरल और सफल बन सकते हैं।

पंचांग के अनुसार मार्गशीर्ष महीने के शुक्ल पक्ष की एकादशी को गीता जयंती मनाई जाती है। इस साल 11 दिसंबर 2024 को गीता जयंती है। इस दिन भगवान श्रीकृष्ण ने अर्जुन को भगवद्गीता का ज्ञान प्रदान किया था। यह वह समय था, जब अर्जुन के कदम महाभारत युद्ध के लिए डगमगाने लगे थे। मान्यता है कि भगवान कृष्ण के उपदेशों को सुनकर ही अर्जुन अपने लक्ष्य की ओर अग्रसर हुए थे।
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सफलता के लिए गीता श्लोक - फोटो : freepik
इंद्रियों पर काबू
भगवान श्रीकृष्ण का मानना था कि मन ही मनुष्य का सबसे बड़ा मित्र और शत्रु है। मन की शांति ही जीवन की सफलता है। अक्सर, हमारी इच्छाएं हमारे मन को नियंत्रित करती हैं और हमें गलत रास्ते पर ले जाती हैं। इसलिए, मन पर विजय पाना ही सच्ची जीत है। मन को शांत करके हम जीवन की अधिकांश समस्याओं का समाधान पा सकते हैं।
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गीता के उपदेश - फोटो : अमर उजाला
निरंतर अभ्यास
श्रीमद्भगवद्गीता हमें सिखाती है कि निरंतर अभ्यास ही सफलता की कुंजी है। अभ्यास से न केवल आत्मविश्वास बढ़ता है बल्कि नए कौशल भी विकसित होते हैं। गीता के अनुसार, जीवन को सरल बनाने के लिए नियमित अभ्यास करना आवश्यक है। अभ्यास से मन एकाग्र होता है और व्यक्ति अपने लक्ष्यों को प्राप्त करने में सफल होता है।

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भगवद् गीता के उपदेश - फोटो : freepik
कर्म करना चाहिए
भगवद् गीता के अनुसार, हर व्यक्ति को अपने कर्म पर ध्यान देना चाहिए। फल की इच्छा मन को भटकाती है। इसलिए हमें कर्म करते रहना चाहिए और फल की चिंता नहीं करनी चाहिए। भगवान श्रीकृष्ण के मुताबिक, जैसा आपका कर्म होगा ईश्वर उसी के अनुरूप ही फल प्रदान करते हैं। इसलिए कभी भी फल की चिंता नहीं करनी चाहिए, क्योंकि कार्य से पहले परिणाम की अपेक्षा करने से मन भ्रमित हो सकता है।
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गीता उपदेश - फोटो : freepik
खुद का मूल्यांकन
श्रीमद्भगवद्गीता के मुताबिक, कोई भी व्यक्ति खुद को खुद से बेहतर नहीं जान सकता है, और न ही समझ सकता है। इसलिए समय समय पर इंसान को आत्म मूल्यांकन यानी की स्वयं का मूल्यांकन करते रहना चाहिए। ऐसा करने से व्यक्ति अपनी कमियों को पहचान कर उसे सुधार सकता है, जो सफलता के मार्ग को आसान बनाता है।

डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): ये लेख लोक मान्यताओं पर आधारित है। यहां दी गई सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है। 
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