ज्योतिष शास्त्र में रत्न पहनने का विशेष महत्व होता है इससे कई तरह की परेशानियों से निजात मिलती है। लोग ग्रहों को अपने पक्ष में रखने के लिए कई तरह के रत्न पहनते है। लाल किताब के अनुसार रत्नों में कमजोर ग्रह को बलशाली बनाने की क्षमता होती है। रत्न का प्रभाव तो होता ही है लेकिन किस धातु में रत्न पहना जाता है उसका विशेष महत्व होता है।
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ज्योतिष शास्त्र के अनुसार रूबी रत्न को तांबा या सोना में पहनना चाहिए, तो वहीं पन्ना के लिए सोना अनुकूल धातु मानी जाती है।
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यदि आपको मोती पहनने की सलाह दी गई है तो इसे हमेशा चांदी में ही पहनें। मोती को कभी सोने में नहीं पहनना चाहिए वहीं यदि कोई व्यक्ति नीलम धारण कर रहा है तो उसे सोने या प्लैटिनम में बनवाएं।
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पुखराज और मूंगा रत्न ज्योतिषशास्त्र में काफी महत्वपूर्ण माना जाता है। पुखराज और मूंगा रत्न को सोने में धारण किया जाता है।
गोमेद और लहसुनिया को अष्टधातु या फिर त्रिलोह में बनवाकर पहनना चाहिए इससे गलत ग्रहों का प्रभाव काफी कम हो जाता है। गुस्सा शांत करने के लिए चांदी की वस्तु पहनने को कहा जाता है। शनि साढ़ेसाती या ढैय्या के प्रकोप से बचने के लिए घोड़े की नाल या लोहे का छल्ला पहनने की सलाह दी जाती है।