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सीख: जीवन में हमेशा कुछ ना कुछ सीखते रहें- दादासाहेब फाल्के

Wed, 25 Sep 2019 11:53 AM IST
विनोद शुक्ला धर्म डेस्क, अमर उजाला
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Dadasaheb Phalke
दादासाहेब फाल्के जिन्हें भारतीय सिनेमा का जनक कहा जाता है, का पूरा नाम धुंडिराज गोविंद फाल्के है। वे एक भारतीय फिल्म निर्माता, निर्देशक और चलचित्र लेखक थे। कड़ी मेहनत और लगन से उन्होंने अपने जीवन में अपार सफलता पाई और हर वो मुकाम हासिल किया जो वो करना चाहते थे। आइए आज उनके जीवन से हम भी जानते हैं सफलता के राज।

 
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Dadasaheb Phalke
अपने सपनो को हासिल करने के लिए उन्होंने कई क्षेत्रो का ज्ञान हासिल किया। उनका मानना था कि जीवन में हमें हमेशा सीखते रहना चाहिए। यही वजह थी कि वे हमेशा अपनी फिल्मों में अलग-अलग तकनीकों के प्रयोगों पर जोर देते थे और उनके उपयोगो को महत्वपूर्ण मानते थे। दादासाहेब फाल्के जीवन में हमेशा कुछ ना कुछ सीखते रहें, उन्होंने सीखना कभी बंद नहीं किया। वे फिल्म जगत में उपयोग होने वाली नई तकनीकों को सीखने के लिए जर्मनी भी गए।  
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dadasaheb phalke - फोटो : file photo
दादासाहेब फाल्के हमेशा नए-नए प्रयोग करते रहते थे। अपनी इस प्रकृति के चलते वे प्रथम भारतीय चलचित्र बनाने का असंभव कार्य करने वाले पहले व्यक्ति बने। हमें भी अपने जीवन में नए-नए प्रयोग करते रहने चाहिए।

 

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Dadasaheb Phalke‬
दादासाहेब फाल्के के अनुसार हमें आलोचनाओं पर ध्यान नहीं देना चाहिए, क्योंकि आलोचक तो हमेशा आलोचना ही करेगा। उनके अपने मित्र ही उनके पहले आलोचक थे। उन्होंने अपने उस मित्र की बातों पर कभी ध्यान नहीं दिया और सफलता के नए आयाम स्थापित किए।
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dadasaheb phalke - फोटो : file photo
दादासाहब फाल्के कभी किसी पर निर्भर नहीं रहते थे। उन्होंने अपनी पहली फिल्म राजा हरिशचंद्र में लगभग सभी कार्य स्वयं करें थे। अभिनय, दृश्य लिखना, फोटोग्राफी और फिल्म प्रोजेक्शन जैसे बड़े कार्य अकेले ही किए थे। हमें उनके जीवन से यह अवश्य सीखना चाहिए कि हमें किसी पर निर्भर नहीं रहना चाहिए।
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