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Chanakya niti: धन का न करें अहंकार, उससे भी महत्वपूर्ण होती हैं ये चीजें

Thu, 22 Apr 2021 12:01 PM IST
Shashi Shashi धर्म डेस्क, अमर उजाला
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आचार्य चाणक्य - फोटो : Social media
आज के समय में भी आचार्य चाणक्य की गिनती भारत के श्रेष्ठ विद्वानों में की जाती है। ये कई विषयों का गहरा ज्ञान रखते थे। ये अर्थशास्त्र के ज्ञाता थे इसलिए इन्हें कौटिल्य और विष्णु गुप्त भी कहा जाता था। आचार्य चाणक्य द्वारा लिखित नीति शास्त्र की नीतियों में जीवन के कई क्षेत्रों से जुड़ी हर समस्या का समाधान बताया गया है। इतने वर्षों के बाद भी नीति शास्त्र की बातें आज भी लोगों के बीच लोकप्रिय हैं। चाणक्य की नीतियां भले ही कठोर लगती हैं परंतु ये मनुष्य को जीवन में सही दिशा देती हैं और आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करती हैं। यदि चाणक्य की नीतियों को सही प्रकार से समझकर जीवन में लागू किया जाए तो ये अंधेरे में दीपक की रोशनी के समान कार्य करती हैं। आचार्य चाणक्य कहते हैं कि जीवन में आवश्यकता पूर्ति के लिए धन जरूरी है परंतु धन का कभी अहंकार नहीं करना चाहिए और न ही इसके पीछे भागना चाहिए क्योंकि जीवन में धन से भी महत्वपूर्ण कई और चीजें हैं। 
 
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आचार्य चाणक्य - फोटो : Social media
धर्म 
आचार्य चाणक्य के अनुसार धन से भी महत्वपूर्ण होता है धर्म। धन प्राप्ति के लिए कभी भी मनुष्य को धर्म का त्याग नहीं करना चाहिए। धर्म ही व्यक्ति को सही और गलत की पहचान करवाता है। धर्म के मार्ग पर चलने वाला व्यक्ति कभी भी अपने मार्ग से नहीं भटकता है और समाज में सम्मान प्राप्त करता है। सम्मान और धर्म को धन से नहीं खरीदा जा सकता है।
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चाणक्य नीति - फोटो : social media
रिश्ते-नाते
जब बात रिश्तों की आए तो उस स्थिति में धन का त्याग करना चाहिए। धन से रिश्ते और उनमें बसा प्रेम समर्पण नहीं खरीदा जा सकता है। जब धन का भी नाश हो जाता है तब उस स्थिति में भी मित्र, परिवार और रिश्ते ही खराब समय में सहारा बनते हैं। इसलिए कभी भी धन के लिए रिश्तों का त्याग नहीं करना चाहिए। धन के अभाव में जीवन यापन किया जा सकता है परंतु प्रेम के बिना जीवन नीरस हो जाता है।
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आचार्य चाणक्य - फोटो : Social media
आत्म सम्मान
किसी के लिए भी उसका आत्मसम्मान सबसे महत्वपूर्ण होता है। धन से आत्म सम्मान नहीं खरीद सकते हैं। इसलिए जब बात आत्मसम्मान की हो तो धन का त्याग कर देना चाहिए। खोए हुए धन को प्राप्त किया जा सकता है लेकिन आत्म सम्मान पर चोट लगने पर व्यक्ति को एक पल की भी शांति प्राप्त नहीं होती है।
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