चाणक्य नीति
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रिश्ते-नाते
जब बात रिश्तों की आए तो उस स्थिति में धन का त्याग करना चाहिए। धन से रिश्ते और उनमें बसा प्रेम समर्पण नहीं खरीदा जा सकता है। जब धन का भी नाश हो जाता है तब उस स्थिति में भी मित्र, परिवार और रिश्ते ही खराब समय में सहारा बनते हैं। इसलिए कभी भी धन के लिए रिश्तों का त्याग नहीं करना चाहिए। धन के अभाव में जीवन यापन किया जा सकता है परंतु प्रेम के बिना जीवन नीरस हो जाता है।