आचार्य चाणक्य
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अभ्यास करने में
आचार्य चाणक्य कहते हैं कि मनुष्य को कभी भी अभ्यास करने में संतुष्ट नहीं होना चाहिए। व्यक्ति जितना अभ्यास करता है वह अपने कार्य और विषय में उतना ही पारंगत होता है। किसी भी कार्य में सफलता प्राप्त करने के लिए उससे संबंधित विषय पर पकड़ होना बहुत आवश्यक होता है, इसलिए लगातार अभ्यास करते रहना चाहिए।