Chanakya Niti
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दुष्ट व्यक्ति और सांप की तुलना
चाणक्य नीति में एक प्रसिद्ध श्लोक है जिसमें दुष्ट व्यक्ति और सांप की तुलना की गई है-
दुर्जनेषु च सर्पेषु वरं सर्पो न दुर्जनः।
सर्पो दंशति कालेन दुर्जनस्तु पदे-पदे।।
अर्थात, दुष्ट व्यक्ति और सांप की तुलना की जाए तो सांप बेहतर है, क्योंकि सांप एक बार डसता है, जबकि दुष्ट व्यक्ति हर कदम पर धोखा देता है। चाणक्य का मानना था कि दुष्ट व्यक्ति को पहचानना बहुत जरूरी है क्योंकि वह हमें बार-बार नुकसान पहुंचाता है। वे केवल एक बार नहीं, बल्कि हर समय हमें धोखा देने की कोशिश करते हैं। इसके विपरीत, सांप अपनी रक्षा के लिए डसता है, इसलिए हमें सांप से ज्यादा डरने की आवश्यकता नहीं है। चाणक्य का यह संदेश है कि हमें दुष्ट लोगों से हर हाल में बचना चाहिए क्योंकि उनका साथ हमारे जीवन को नष्ट कर सकता है।