चाणक्य नीति
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स्वहस्तग्रथिता माला स्वहस्तघृष्टचंदनम्।
स्वहस्तलिखितं स्तोत्रं शक्रस्यापि श्रियं हरेत्।।
चाणक्य नीति के अनुसार इसका अर्थ है कि, जो व्यक्ति अपनी मेहनत से सब कुछ हासिल कर सकता है। उसे भगवान की स्तुति के लिए किए जाने वाले उपाय भी खुद से करने चाहिए, दूसरों के भरोसे रहने से कोई फायदा नहीं होता है।