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Chanakya Niti: बच्चों की इन आदतों पर मां बाप को सदा रखना चाहिए ध्यान, वरना उठानी पड़ सकती है बड़ी मुसीबत

Tue, 13 Jul 2021 06:42 PM IST
संकल्प सिंह धर्म डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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आचार्य चाणक्य - फोटो : Social media
आचार्य चाणक्य की गिनती भारत के महानतम विद्वानों में की जाती है। अपने समय के ये बहुत ही विद्वान पुरुष थे। इनकी शख्सियत का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि इन्होंने एक मामूली से दिखने वाले बालक को भारत का महान शासक बना दिया था। अपने समय में ये विष्णुगुप्त और कौटिल्य के नाम से जाने जाते थे। इनके द्वारा लिखी गई पुस्तक अर्थशास्त्र आज के समय में भी प्रासंगिक है। आचार्य चाणक्य ने धर्म, समाज, राजनीति, अर्थव्यवस्था आदि विभिन्न विषयों पर खुल कर अपने मतों को व्यक्त किया। इन्होंने अपनी बुद्धि के बल पर इतिहास की धारा को ही बदल के रख दिया। चाणक्य ने माता-पिता को अपने बच्चों की देखरेख कैसे करनी चाहिए? इस विषय पर भी बहुत कुछ कहा। इन्होंने चाणक्य नीति में बच्चों की उन आदतों के बारे में जिक्र किया था, जिन पर एक माता-पिता को सदा ध्यान रखना चाहिए। आइए जानते हैं -
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आचार्य चाणक्य - फोटो : Social media
कई बच्चे काफी जिद्दी होते हैं। इस स्वभाव के बच्चे किसी की बात नहीं मानते हैं। यहां तक कि वे अपने माता-पिता की आज्ञा का भी पालन नहीं करते। अक्सर मां-बाप बच्चों की इन आदतों को शैतानी समझकर नजरअंदाज कर देते हैं। आचार्य चाणक्य के अनुसार इन हालातों में मां बाप को अपने बच्चों के साथ प्यार से बात करनी चाहिए। 
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आचार्य चाणक्य - फोटो : Social media
आचार्य चाणक्य के मुताबिक जो बच्चा बचपन में ही अपने माता-पिता से झूठ बोलने लगता है। ऐसी परिस्थिति में मां-बाप को जल्द से जल्द अपने बच्चे की इस आदत को छुड़वाना चाहिए। उन्हें अपने बच्चों को ये प्यार से बताना चाहिए कि झूठ बोलना गलत है। अन्यथा ऐसे बालक बड़े होकर और भी बड़े झूठ बोलने लगते हैं, जिसके चलते उन्हें आगे चलकर कई गंभीर समस्याओं का सामना करना पड़ता है।

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आचार्य चाणक्य - फोटो : Social media
चाणक्य के मुताबिक ऐसे बच्चों को बचपन से ही हमारे महापुरुषों के बारे में बताना चाहिए। उनकी कहानियां सुनानी चाहिए। इससे उन्हें अच्छे कार्यों को करने की प्रेरणा मिलती है। उनके मस्तिष्क में सकारात्मक विचार आते हैं। वे अच्छे कार्य करने के लिए प्रोत्साहित होते हैं।
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आचार्य चाणक्य - फोटो : Social media
आचार्य चाणक्य का कहना था कि बच्चों को कभी भी डांट धमकाकर नहीं समझाना चाहिए। इससे वे जिद्दी स्वभाव के हो जाते हैं। उनके साथ हमेशा प्यार से बात करनी चाहिए। इससे वे बात को जल्दी समझते हैं।
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