प्रतीकात्मक तस्वीर
इसमें आचार्य चाणक्य ने यह बताया है कि हमें अच्छे स्वास्थ्य के लिए पानी किस समय पीना चाहिए। क्योंकि हम अक्सर पानी पीने के सही तरीके से अंजान होते हैं। इसी प्रकार वे खान-पान को लेकर कहते हैं कि हम जैसा भोजन ग्रहण करेंगे। वैसा ही हमारा मन परिवर्तित होगा। उसी के अनुरूप ही हम आचरण करेंगे।
इस संबंध में एक कहावत भी है कि जैसा खाएंगे अन्न, वैसा होगा मन। आचार्य चाणक्य के अनुसार, यदि हम सात्विक भोजन करते हैं तो हमारा मन सात्विक होता है। हमारे विचार भी निर्मल होते हैं। ऐसे ही राजसिक भोजन करने पर राजसी विचार आते हैं और तामसिक भोजन करने पर हमारे विचारों में भी उस तरह का भाव देखने को मिलता है।