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Chanakya Niti: आचार्य चाणक्य के अनुसार गलत तरीकों से कमाया धन नहीं देता तरक्की, बढ़ जाती है दरिद्रता

Mon, 08 Dec 2025 09:54 PM IST
सोनिया चौहान धर्म डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

आचार्य चाणक्य ने अपने प्रसिद्ध ग्रंथ 'चाणक्य नीति' में ऐसे लोगों के बारे में बताया है, जिन लोगों के पास धन ज्यादा समय तक नहीं ठहरता, चाहे वे कितना भी कमा लें। यदि इन बातों को ध्यान में रखा जाए तो व्यक्ति समस्याओं से तो बच ही सकता है, साथ ही एक संतुष्ट और सफल जीवन भी व्यतीत कर सकता है। आइए इसके बारे में विस्तार से जानते हैं।

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चाणक्य नीति - फोटो : Amar Ujala
Chanakya Niti In Hindi: हर व्यक्ति अपने जीवन को बेहतर बनाने और जरूरतों को पूरा करने के लिए धन अर्जित करता है। लेकिन कुछ लोग कड़ी मेहनत की जगह आसान रास्तों को चुनकर जल्दी अमीर बनना चाहते हैं। ऐसे लोग भले ही थोड़े समय के लिए संपन्न बन जाएं, पर उनका धन टिकता नहीं और वे अक्सर आर्थिक तंगी में फंसे रहते हैं। ऐसा धन व्यक्ति की मानसिक शांति छीन उसे कर्ज और तनाव में डाल देता है। 
 
आचार्य चाणक्य, जिन्हें महान राजनीतिज्ञ, अर्थशास्त्री और कुशल नीतिकार के रूप में जाना जाता है। चाणक्य के अनुसार, युवावस्था मनुष्य के जीवन में सफलता प्राप्त करने के लिए बहुत ही महत्वपूर्ण समय होता है। इसलिए जीवन में सफल बनने के लिए इस अवस्था में कड़ी मेहनत के साथ ही हर व्यक्ति को कुछ बातों का भी ध्यान रखना चाहिए। चाणक्य ने अपने प्रसिद्ध ग्रंथ 'चाणक्य नीति' में ऐसे लोगों के बारे में बताया है, जिन लोगों के पास धन ज्यादा समय तक नहीं ठहरता, चाहे वे कितना भी कमा लें। आइए इसके बारे में विस्तार से जानते हैं।
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आचार्य चाणक्य की नीतियां - फोटो : Amar Ujala
श्लोक

अन्यायोपार्जितं द्रव्यं दश वर्षाणि तिष्ठति।
प्राप्ते एकादशे वर्षे समूलं च विनश्यति।।

अर्थ: अन्याय या गलत तरीके से अर्जित धन अधिकतम दस वर्षों तक टिकता है, ग्यारहवें वर्ष में वह पूरी तरह नष्ट हो जाता है। 
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चाणक्य नीति - फोटो : Amar Ujala
अनैतिक तरीके से कमाया गया धन
चाणक्य के अनुसार जो धन ईमानदारी से नहीं, बल्कि अनुचित या धोखाधड़ी के माध्यम से अर्जित किया गया हो, वह सिर्फ क्षणिक सुख देता है। ऐसा धन आपको समृद्धि नहीं देता। यह व्यक्ति की मानसिक शांति छीनने के साथ भविष्य में दुखों का कारण भी बनता है।


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चाणक्य के मुख्य सिद्धांत - फोटो : Amar Ujala
धोखे से धन कमाने वालों का भविष्य
अगर कोई व्यक्ति दूसरों को धोखा देकर धन कमाता है, तो उसका सम्मान धीरे-धीरे समाप्त हो जाता है। चाणक्य के अनुसार, समाज ऐसे लोगों को तिरस्कृत करता है। ऐसे लोगों के संबंध खराब होते हैं और वह कर्ज तथा मानसिक तनाव से घिर जाते हैं।
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चाणक्य नीति - फोटो : Amar Ujala
चोरी से अर्जित धन
चोरी या छल-कपट से मिला पैसा कभी स्थायित्व नहीं देता। यह न तो आत्मिक संतोष देता है और न ही सुख-शांति। चाणक्य के अनुसार, चोरी करने वाला व्यक्ति समाज में मान-सम्मान खो देता है। चोरी की कमाई से न केवल स्वयं व्यक्ति का पतन होता है, बल्कि उसके परिवार और वंश को भी इसका दुष्परिणाम भुगतना पड़ता है।





डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): ये लेख लोक मान्यताओं पर आधारित है। यहां दी गई सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है। 
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