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Chanakya Niti: अच्छे और बुरे इंसान की परख करने में होती है परेशानी, तो इन बातों को हमेशा रखें ध्यान

Tue, 01 Mar 2022 10:28 AM IST
श्वेता सिंह धर्म डेस्क, अमरउजाला, नई दिल्ली
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Chanakya Neeti: चाणक्य जी की नीतियों के माध्यम से हम यह पता लगा सकते हैं कि मनुष्य को किस परिस्थिति में कैसा व्यवहार करना चाहिए। - फोटो : amar ujala
Chanakya Neeti: आचार्य चाणक्य ने अपने जीवन में विषम से विषम परिस्थितियों का सामना किया था परंतु कभी हार नहीं मानी और अपने लक्ष्य को प्राप्त किया। अगर कोई व्यक्ति की आचार्य चाणक्य की बातों का अनुसरण अपने जीवन में करता है, तो वह जीवन में कभी गलती नहीं करेगा और सफल मुकाम पर पहुंच सकता है। महान अर्थशास्त्री और कूटनीतिज्ञ आचार्य चाणक्य ने अपने नीति शास्त्र में मानव कल्याण से जुड़े लगभग सभी विषयों का जिक्र किया है। चाणक्य जी की नीतियों के माध्यम से हम यह पता लगा सकते हैं कि मनुष्य को किस परिस्थिति में कैसा व्यवहार करना चाहिए।
आचार्य चाणक्य के अनुसार मनुष्य के जीवन में इंसान को परखना बेहद मयत्वपूर्ण होता है। यदि व्यक्ति को धोखे और मुसीबतों से बचना है तो इस कला का आना बेहद आवश्यक है अन्यथा जीवन में उसको बहुत बड़ा धोखा मिल सकता है। परनातू हर व्यक्ति के अंदर अच्छे और बुरे मनुष्य को परखने का गुण नहीं होता है। आचार्य चाणक्य ने अपनी नीति शास्त्र में इससे जुड़ी कुछ जरूरी बातों का जिक्र किया है। यदि मनुष्य इन बातों को समझेगा तो वह सही और गलत में फरक समझ पाएगा और उसके जीवन की राह आसान हो जाएगी। आइए जानते हैं क्या हैं वो बातें- 
 
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आचार्य चाणक्य के अनुसार व्यक्ति की पहचान उसके चरित्र से ही होती है। - फोटो : istock
मनुष्य का चरित्र: आचार्य चाणक्य के अनुसार व्यक्ति की पहचान उसके चरित्र से ही होती है, व्यक्ति का चरित्र उसके जीवन की सच्चाई को खोल कर रख देता है। आपके किसी करीबी का चरित्र ऐसा है जिसकी लोग तारीफ करते हैं तो इसका मतलब है वह आपके लिए सही है लेकिन अगर उसके आपके अगर किसी व्यक्ति का चरित्र ठीक नहीं है और आप उसकी संगति में है तो उसकी छवि आपको हानि पहुंच सकती है। इसलिए ऐसे लोगों से दूर रहना ही सही रहता है। 
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आचार्य चाणक्य के अनुसार मनुष्य के अंदर मानवता होनी बेहद आवश्यक है। - फोटो : istock
मनुष्यता का भाव: आचार्य चाणक्य के अनुसार मनुष्य के अंदर मानवता होनी बेहद आवश्यक है। यदि मनुष्य के अंदर मानवता है तो उसकी अंदर की मानवीय भावना सबके समक्ष प्रस्तुत हो जाएगी और उसकी अच्छाई को लोग पसंद करेंगे वहीं अगर मनुष्य के अंदर मानवता नाम की कोई चीज नहीं है तो इसका अर्थ है वह आपके लिए भी सही नहीं है। इस प्रकार के व्यक्ति हमेशा दूसरों का दुख देखकर प्रसन्न होते हैं। 

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आचार्य चाणक्य के अनुसार मनुष्य को उनकी आदतों के जरिए पहचाना जा सकता है। - फोटो : istock
मनुष्य की आदतें: चाणक्य का नीति शास्त्र कहता है कि जिन व्यक्तियों में आलस्य कूट कूट कर भरा होता है, जो बुरे व्यसन करते हैं या जो लोग झूठ बोलते हैं ऐसे लोगों से जितना दूर रहेंगे उतना ही आपके लिए बेहतर रहेगा। क्योंकि इस प्रकार के लोग मुसीबत लाने के अलावा कुछ नहीं कर सकते। 
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आचार्य चाणक्य ने अपनी नीतियों में बताया है कि मनुष्य के कर्म उसकी अच्छाई या बुराई की परख करते हैं। - फोटो : istock
मनुष्य के कर्म: आचार्य चाणक्य ने अपनी नीतियों में बताया है कि मनुष्य के कर्म उसकी अच्छाई या बुराई की परख करते हैं। यदि मनुष्य सदैव दूसरे मनुष्य की मदद करने के लिए तत्पर रहता है तो इसका अर्थ है कि वह अच्छे कर्मों में लिप्त है, वहीं यदि मनुष्य कुछ भी गलत कार्य करता है और धन कमाता और उससे लोगों की मदद करता है लेकिन फिर भी ऐसा व्यक्ति आपको नुकसान पहुंचाने में भी देरी नहीं करेगा। इसलिए ऐसे लोगों से दूरी बनाकर रखें। 
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