स्वार्थ
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स्वार्थ
चाणक्य के अनुसार, किसी व्यक्ति को समझने का सबसे सही समय वह होता है जब उसके सामने कोई स्वार्थ न हो। जब न पुरस्कार की चाह हो, न प्रशंसा की उम्मीद और न कोई निजी लाभ, तब व्यक्ति दिखावा नहीं करता। ऐसे अवसरों पर उसका असली चरित्र सामने आता है। जो बिना निगरानी के जिम्मेदारी निभाता है, जो नुकसान होने पर भी ईमानदारी नहीं छोड़ता, वही अपनी सच्ची नीयत दिखाता है। यदि किसी की अच्छाई केवल लाभ मिलने तक सीमित है, तो वही उसका वास्तविक स्वभाव है।