आचार्य चाणक्य
- फोटो : Social media
दूसरों के घर में रहने वाले लोग
चाणक्य के अनुसार जो लोग दूसरों के घर में रहते हैंं, वे बहुत जल्दी नष्ट हो जाते हैं, क्योंकि ऐसे व्यक्ति के पास स्वयं का कुछ नहीं होता है। ये केवल दूसरों पर आश्रित होते हैं और दूसरों पर आश्रित रहने वालों का कोई अस्तित्व नहीं होता है, इसलिए ये बहुत जल्दी नष्ट हो जाते हैं।