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बहुत जल्दी नष्ट हो जाते हैं ये लोग, जानें क्या कहती है चाणक्य नीति

Mon, 24 May 2021 10:37 AM IST
Shashi Shashi धर्म डेस्क, अमर उजाला
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आचार्य चाणक्य - फोटो : Social media
आचार्य चाणक्य की गिनती आज के समय में भी श्रेष्ठ विद्वानों में की जाती है। आचार्य चाणक्य न केवल एक विद्वान बल्कि एक योग्य शिक्षक भी थे। इन्होंने विश्वप्रसिद्ध तक्षशिला विश्वविद्यालय से शिक्षा ग्रहण की और वहीं पर शिक्षक के रूप में विद्यार्थियों को शिक्षा भी प्रदान की। इनके जीवन का बहुत सारा हिस्सा अध्यापन के कार्य में ही व्यतीत हुआ। ये कई विषयों की गहरी समझ रखते थे। ये अर्थशास्त्र के मर्मज्ञ थे, जिसके कारण इन्हें कौटिल्य कहा जाता था। आचार्य चाणक्य एक कुशल, राजनीतिज्ञ, कूटनीतिज्ञ और अर्थशास्त्री थे। इन्होंने अपनी बुद्धि और नीतियों के बल पर ही नंद वंश का नाश करकें चंद्रगुप्त को एक साधारण बालक से सम्राट के रूप में स्थापित किया। इनके द्वारा लिखित नीतिशास्त्र की बातें आज भी लोगों के बीच बहुत लोकप्रिय हैं लेकिन इनकी नीतियों को कई बार तोड़मरोड़ कर पेश किया जाता है। यदि नीति शास्त्र की बातों के अर्थ को सही प्रकार से समझा जाए तो यह जीवन के हर एक पहलू के स्पर्श करती हैं। नीतिशास्त्र की शिक्षाओं के सार को अपने जीवन में उतारकर व्यक्ति सुखी और संतुष्ट जीवन व्यतीत कर सकता है। नीति शास्त्र में तीन ऐसी चीजों के बारे में बताया है जो बहुत जल्दी नष्ट हो जाती हैं। तो चलिए जानते हैं क्या कहती है चाणक्य नीति
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आचार्य चाणक्य - फोटो : Social media
नदी किनारे लगे हुए पेड़
आचार्य चाणक्य कहते हैं कि नदी किनारे लगे हुए पेड़ बहुत जल्दी नष्ट हो जाते हैं क्योंकि जब नदीं में वेग आता है तो वह सबसे पहले अपने आस-पास की चीजों को बहा ले जाता है। कहने का तात्पर्य यह है कि नदी के वेग से सदैव दूर रहना चाहिए।
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आचार्य चाणक्य - फोटो : Social media
दूसरों के घर में रहने वाले लोग
चाणक्य के अनुसार जो लोग दूसरों के घर में रहते हैंं, वे बहुत जल्दी नष्ट हो जाते हैं, क्योंकि ऐसे व्यक्ति के पास स्वयं का कुछ नहीं होता है। ये केवल दूसरों पर आश्रित होते हैं और दूसरों पर आश्रित रहने वालों का कोई अस्तित्व नहीं होता है, इसलिए ये बहुत जल्दी नष्ट हो जाते हैं।
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आचार्य चाणक्य - फोटो : Social media
बिना मंत्री राजा
आचार्य चाणक्य कहते हैं कि बिना मंत्री का राजा बहुत जल्दी नष्ट हो जाता है क्योंकि मंत्री ही वह व्यक्ति होता है जो राजा को सही समय पर सही सलाह देता है और उसे राज्य के बारे में अवगत कराता है।
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