आचार्य चाणक्य एक श्रेष्ठ विद्वान और एक योग्य शिक्षक थे। इन्हें चाणक्य नाम अपने गुरु चणक से प्राप्त हुआ था। इन्होंने अपने जीवन में अच्छी और बुरी दोनों तरह की परिस्थितियों का सामना किया परंतु कभी भी अपना धैर्य नहीं खोया और अपनी बुद्धिमत्ता से नंद वंश का नाश कर चंद्रगुप्त को मौर्य साम्राज्य का राजा बनाया। ये तीक्ष्ण बुद्धि के धनी थे। इन्हें विष्णु गुप्त और कौटिल्य के नाम से भी जाना जाता था। आचार्य चाणक्य को कूटनीति, राजनीति और अर्थशास्त्र में महारत हासिल थी। इनके द्वारा लिखित नीति शास्त्र की बातें मनुष्य के जीवन को बहुत ही करीब से स्पर्श करती हैं। यही कारण है कि आज भी चाणक्य नीति की बातें लोगों में बहुत लोकप्रिय हैं। आचार्य चाणक्य ने नीति शास्त्र में कुछ ऐसी परिस्थितियों के बारे में वर्णन किया है जिनमें राजा, मित्र और शिष्य न होना ही बेहतर होता है। जानते हैं कि कौन सी हैं वे परिस्थितियां।