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चाणक्य नीति: दुख में भी किसी को नहीं बतानी चाहिए ये बातें, उठाना पड़ता है नुकसान

Thu, 18 Mar 2021 05:12 PM IST
Shashi Shashi धर्म डेस्क, अमर उजाला
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आचार्य चाणक्य - फोटो : Social media
आचार्य चाणक्य बहुत ही कुशाग्र बुद्धि के विद्वान थे। आज को समय में भी उनकी गिनती श्रेष्ठ विद्वानों में की जाती है। आचार्य चाणक्य ने विपरीत परिस्थितियों में भी अपनी बुद्धि का प्रयोग करते हुए अपने शत्रु को पराजित किया। आचार्य चाणक्य ने अपने ज्ञान और अनुभव के आधार पर नीतिशास्त्र की रचना की। जिसे चाणक्य नीति भी कहा जाता है। आचार्य चाणक्य द्वारा लिखें गए नीतिशास्त्र में जीवन के विभिन्न पहलुओं से संबंधित महत्वपूर्ण बातें बताई गई हैं। नीतिशास्त्र में चाणक्य ने ऐसी बातों के बारे में जिक्र किया है, जिन्हें  दुख के समय भी दूसरों को नहीं बताना चाहिए। यदि कोई व्यक्ति इन बातों का जिक्र दूसरों के सामने करता है तो उसे अपमान और नुकसान का सामना करना पड़ सकता है। तो चलिए जानते हैं कौन सी हैं वे बातें।  

 
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आचार्य चाणक्य - फोटो : Social media
धन का नाश होने पर
चाणक्य कहते हैं कि बुद्धिमान व्यक्ति को धन का नाश होने पर किसी के सामने इस बात का जिक्र नहीं करना चाहिए। आपकी इस स्थिति में लोग आपके सामने तो सहानुभूति प्रकट करते हैं परंतु सहायता करने से कतराते हैं। धन का नाश होने की स्थिति में कोई भी व्यक्ति फायदा उठा सकता है। आप समस्याओं में तो घिर ही सकते हैं साथ ही आपको अपमान का सामना भी करना पड़ सकता है। 
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आचार्य चाणक्य - फोटो : Social media
परिवार के विवाद के बारे में
आचार्य चाणक्य कहते हैं कि परिवार में किसी प्रकार का दोष होने पर किसी के सामने इस बात का जिक्र नहीं करना चाहिए। यदि परिवार में किसी प्रकार की कलह है या फिर किसी सदस्य में कोई दोष है तो इस बात को भूलकर भी दूसरों के सामने कभी नहीं बोलना चाहिए। आपके परिवार के आपसी मतभेद का लोग फायदा उठाते हैं।  

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आचार्य चाणक्य - फोटो : Social media
आचार्य चाणक्य कहते हैं कि पति-पत्नी की बात को कभी भी तीसरे व्यक्ति के सामने नहीं कहना चाहिए। इससे आपके मान-सम्मान को ठेस पहुंच सकती है। पति-पत्नी का संबंध बहुत ही निजी होता है। यदि पति-पत्नी के बीच किसी प्रकार का विवाद हो और पत्नी कोई गलत व्यवहार कर दे तो इस बात का जिक्र भूलकर भी किसी के सामने नहीं करना चाहिए। 
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आचार्य चाणक्य - फोटो : Social media
किसी के द्वारा अपमानित करने पर 
आचार्य चाणक्य के अनुसार यदि कहीं पर आपको कटु और गलत शब्द सुनने पड़े हो और आपका अपमान हुआ हो तो इस बात के बारे में किसी को नहीं बताना चाहिए। लोग सहानुभूति दिखाने के स्थान पर उपहास करते हैं। इसलिए इन बातों को जितना गुप्त रखा जाए उतना ही बेहतर रहता है। 
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