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Chanakya Niti : बच्चों के सामने ऐसा कार्य करने से करें परहेज, वरना ज़िंदगी भर होगा पछतावा

Mon, 27 Dec 2021 11:08 AM IST
श्वेता सिंह धर्म डेस्क, अमरउजाला
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चाणक्य नीति - फोटो : amar ujala
Chanakya Niti : चाणक्य नीति आचार्य  चाणक्य द्वारा रचित एक नीति ग्रन्थ है। इसमें सूत्रात्मक शैली में जीवन को सुखमय एवं सफल बनाने के लिए उपयोगी सुझाव हैं। इसका मुख्य उद्देश्य मनुष्य को जीवन के प्रत्येक पहलू की व्यावहारिक शिक्षा देना है। आचार्य चाणक्य के इस  नीतिपरक ग्रंथ में जीवन-सिद्धान्त और जीवन-व्यवहार तथा आदर्श और यथार्थ का बड़ा सुन्दर समन्वय देखने को मिलता है। आचार्य चाणक्य की कहीं हर बात आज भी उतनी ही सही है जितनी वह उस जमाने में हुआ करती थी। चाणक्य नीति आपको अपने जीवन में कुछ भी हासिल करने में मदद करती है, इससे कोई फर्क नहीं पड़ता कि आप किस क्षेत्र में हैं। यदि आप चाणक्य नीति को पूरी तरह से पढ़ते हैं और उसका अनुसरण करते हैं, तो कोई भी आपको सफल होने से रोक नहीं सकता आप कभी भी किसी के धोखे का शिकार नहीं होंगे और जीवन में हमेशा सफलता पाएंगे। आचार्य चाणक्य ने अपने नीति शास्त्र में बच्चों, बड़ों और बुजुर्गों सबके लिए कोई न कोई सीख दी है। आचार्य चाणक्य के अनुसार हर व्यक्ति को बच्चों के सामने बात करते समय सोच विचार कर बात करनी चाहिए। क्योंकि बच्चे गीली मिट्टी के समान होते हैं उन्हें आप जैसा ढालेंगे वे वैसे ही ढल जाएंगे। इसलिए बच्चों के सामने बात करते समय बहुत सावधानी बरतें अन्यथा आपको जीवन भर का पछतावा रहेगा। आइए जानते हैं नीतिशास्त्र के अनुसार बच्चों के सामने किन बातों से परहेज करना चाहिए। 
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अपशब्द से करें परहेज
अपशब्द से करें परहेज:  कहते हैं न कमान से निकला  हुआ तीर और जुबान से निकली हुयों बात कभी वापस नहीं आती। आचार्य चाणक्य के अनुसार मनुष्य को बच्चों के सामने किसी भी प्रकार के अपशब्दों का प्रयोग नहीं करना चाहिए। यदि आप ऐसा करते हैं तो भविष्य में आपका यही बच्चा सबके सामने ऐसे अपशब्दों का प्रयोग कर आपको शर्मिंदा कर सकता है। इसलिए बच्चों के सामने कभी अपशब्दों का प्रयोग न करें। प्रयास करें कभी ऐसा मौका ही न आए कि आपको अमर्यादित भाषा का प्रयोग करना पड़े। 
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बच्चों के सामने झूठ न बोलें
बच्चों के सामने झूठ न बोलें: अक्सर आपने देखा होगा माता पिता बच्चों को सच बोलने का पाठ पढ़ते हैं। वह उनसे यह भी कहते हैं जीवन में हमेशा सच बोलना चाहिए और इयांदार बने रहना चाहिए। लेकिन यही-माता-पिता कई बार बच्चों के सामने झूठ भी बोल देते हैं जो कि बिल्कुल सही नहीं है। यदि माता-पिता बच्चों के सामने झूठ बोलेंगे या उन्हें अपने झूठ में शामिल करेंगे तो बच्चों की नजर में वो अपना सम्मान खो देंगे। और यदि ऐसा हुआ तो आपको इसके लिए जीवन भर पछताना होगा। 

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किसी का अपमान न करें
किसी का अपमान न करें: आमतौर पर  पति-पत्नी में यदि कोई मनमुटाव होता है तो बच्चों के सामने वो एक दूसरे से लड़ते हैं और एक दूसरे की कमियां निकालते हैं। आचार्य चाणक्य के नीतिशास्त्र के अनुसार जो पति-पत्नी बच्चों के सामने एक दूसरे का अपमान करते हैं उनके बच्चों की नजर में उनका कोई सम्मान नहीं रह जाता। और की बार ऐसा भी होता है कि बच्चे भी आपका अपमान करने से नहीं चूकते। इसलिए  यदि बच्चों से सम्मान की उम्मीद रखते हैं तो बच्चों के सामने ही नहीं आम ज़िंदगी में भी एक दूसरे का सम्मान करें। 
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अनुशासनहीन न बनें
अनुशासनहीन न बनें: यदि आप चाहते हैं कि बच्चे आपसे कुछ अच्छा सीखें और आपका अनुकरण करें तो आपको अनुशासनप्रिय होना होगा। दरअसल यदि पिता अनुक्षण प्रिय नहीं होगा तो बच्चे भी अनुशासन का पाठ नहीं पढ़ेंगे। और हर बात के लिए माता या पिता को ही जिम्मेदार ठहराएंगे। चाणक्य नीति कहती है बच्चों के समक्ष अनुशासन का उदाहरण प्रस्तुत करें जिससेबच्चे भविष्य में जिम्मेदार बनें न कि जिम्मेदारी से भागें। 
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