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चाणक्य नीति: इंसान के होते हैं ये चार अच्छे मित्र, आखिरी समय तक मिलता है इनका साथ

Fri, 12 Jul 2019 08:44 AM IST
विनोद शुक्ला धर्म डेस्क, अमर उजाला
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आचार्य चाणक्य ने अपनी नीति में चार सबसे अच्छे मित्रों के बारे में बताया है। आचार्य चाणक्य की इस नीति में इसका जिक्र है।
विद्या मित्रं प्रवासेषु भार्या मित्र गृहेषु च।
वयाधितस्यौषधं मित्र धर्मो मित्र मृतस्य।
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ज्ञान 
आचार्य चाणक्य ने कहा है कि किसी भी व्यक्ति की सबसे बड़ी पूंजी उसका ज्ञान होता है। ज्ञान के सहारे ही दुनिया की हर चीज को हासिल करना आसान हो जाता है। जो व्यक्ति अपने परिवार और घर से दूर रहता है शिक्षा ही उसकी सबसे बड़ी मित्र होती है। घर से दूर रहने पर व्यक्ति का ज्ञान ही परेशानियों से उसकी रक्षा करता है। ज्ञानी व्यक्ति की प्रंशसा उसके जीवित रहते भी होती है और मरने के बाद भी उसके ज्ञान की प्रशंसा होती है।
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गुणी पत्नी
गुणी पत्नी से अच्छा कोई और दूसरा मित्र नहीं होता। गुणी पत्नी की वजह से ही परिवार और समाज में उसका मान-सम्मान बढ़ता है। व्यक्ति को अच्छी पत्नी मिलने से सारी परेशानियों का बोझ कम हो जाता है।

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औषधि
दवा भी इंसान की सबसे अच्छी दोस्त होती है। बीमार व्यक्ति के पास गुणी पत्नी के अलावा दवा ही बीमारियों से छुटकारा दिलाती है। दवा खाने से ही व्यक्ति दोबारा पहले जैसा सेहतमंद हो जाता है।
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धर्म 
धर्म भी व्यक्ति के सबसे अच्छे मित्रों में से एक है। जीवित होने पर धर्म व्यक्ति को सही रास्ता दिखाता है और मरने के बाद भी उसके द्वारा किए गए अच्छे कर्मो का फल स्वर्ग में मिलता है।
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