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Budhwar Ke Upay: बुधवार को इन मंत्रों का करें जाप, करियर में मिल सकती है तरक्की

Wed, 19 Feb 2025 04:30 AM IST
मेघा कुमारी धर्म डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

Budhwar Ke Upay: सप्ताह में बुधवार का दिन गौरी पुत्र गणेश की उपासना को समर्पित है। इस दिन उनकी पूजा-अर्चना करने से व्यक्ति के जीवन में सुख-समृद्धि का वास होता है। 
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हिंदू धर्म में भगवान गणेश को प्रथम पूज्य देवता कहा जाता है, उनकी उपासना से साधक को बल बुद्धि का आशीर्वाद प्राप्त होता है। - फोटो : freepik
Budhwar Ke Upay: हिंदू धर्म में भगवान गणेश को प्रथम पूज्य देवता कहा जाता है, उनकी उपासना से साधक को बल बुद्धि का आशीर्वाद प्राप्त होता है। शास्त्रों में गौरी पुत्र गणेश को विघ्नहर्ता कहा गया है, क्योंकि वह सभी की समस्याओं का निवारण करते हैं। माना जाता है कि बुधवार के दिन उनकी पूजा करने और मोदक का भोग लगाने से जीवन में सुख-समृद्धि का वास होता है। वहीं ये भी कहा जाता है कि छात्रों को गणेश जी की उपासना अवश्य करनी चाहिए, क्योंकि वह बुद्धि के दाता है और उनकी कृपा से करियर में अच्छे परिणाम प्राप्त होते हैं। पूजा के दौरान आरती के साथ-साथ गजानन के मंत्र का जाप जरूर करें, यह बहुत शुभ होता है। ऐसे में आइए इन मंत्रों के बारे में जानते हैं...
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Budhwar Ke Upay - फोटो : freepik
वक्रतुण्ड महाकाय सूर्यकोटि समप्रभ। 
निर्विघ्नं कुरु मे देव सर्वकार्येषु सर्वदा॥
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Budhwar Ke Upay - फोटो : freepik
गणपूज्यो वक्रतुण्ड एकदंष्ट्री त्रियम्बक:। 
नीलग्रीवो लम्बोदरो विकटो विघ्रराजक :।। 
धूम्रवर्णों भालचन्द्रो दशमस्तु विनायक:। 
गणपर्तिहस्तिमुखो द्वादशारे यजेद्गणम।।' 

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Budhwar Ke Upay - फोटो : freepik
त्रयीमयायाखिलबुद्धिदात्रे बुद्धिप्रदीपाय सुराधिपाय। 
नित्याय सत्याय च नित्यबुद्धि नित्यं निरीहाय नमोस्तु नित्यम्।

एकदन्तं महाकायं लम्बोदरगजाननम्ं।
विघ्नशकरं देवं हेरम्बं प्रणमाम्यहम्॥
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Budhwar Ke Upay - फोटो : freepik
गजाननाय पूर्णाय साङ्ख्यरूपमयाय ते ।
विदेहेन च सर्वत्र संस्थिताय नमो नमः ॥

ॐ ग्लौम गौरी पुत्र,वक्रतुंड,गणपति गुरु गणेश
ग्लौम गणपति,ऋदि्ध पति। मेरे दूर करो क्लेश।।

 
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Budhwar Ke Upay - फोटो : freepik

गणेश स्तुति मंत्र

ॐ श्री गणेशाय नम:।
ॐ गं गणपतये नम:।
ॐ वक्रतुण्डाय नम:। 
ॐ हीं श्रीं क्लीं गौं ग: श्रीन्महागणधिपतये नम:।
ॐ विघ्नेश्वराय नम:।
गजाननं भूतगणादि सेवितं, कपित्थ जम्बूफलसार भक्षितम्।
उमासुतं शोक विनाशकारणं, नमामि विघ्नेश्वर पादपंकजम्।

 

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गणेश जी की आरती  - फोटो : freepik
गणेश जी की आरती 
जय गणेश जय गणेश, जय गणेश देवा।
माता जाकी पार्वती पिता महादेवा॥
एक दंत दयावंत, चार भुजा धारी।
माथे सिंदूर सोहे, मूसे की सवारी॥
जय गणेश जय गणेश, जय गणेश देवा।
माता जाकी पार्वती पिता महादेवा॥
पान चढ़े फल चढ़े, और चढ़े मेवा।
लड्डुअन का भोग लगे संत करें सेवा॥
जय गणेश जय गणेश, जय गणेश देवा।
माता जाकी पार्वती पिता महादेवा॥
अंधन को आंख देत, कोढ़िन को काया।
बांझन को पुत्र देत निर्धन को माया॥
जय गणेश जय गणेश, जय गणेश देवा।
माता जाकी पार्वती पिता महादेवा॥
सूर' श्याम शरण आए, सफल कीजे सेवा।
माता जाकी पार्वती पिता महादेवा॥
जय गणेश जय गणेश, जय गणेश देवा।
माता जाकी पार्वती पिता महादेवा॥
दीनन की लाज रखो, शंभु सुतकारी।
कामना को पूर्ण करो जाऊं बलिहारी॥
जय गणेश जय गणेश, जय गणेश देवा।
माता जाकी पार्वती पिता महादेवा॥



डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): यहां दी गई जानकारी सामान्य मान्यताओं, ज्योतिष, पंचांग, धार्मिक ग्रंथों आदि पर आधारित है। यहां दी गई सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है।
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