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Ravidas Jayanti 2025: संत रविदास की जयंती के अवसर पर पढ़ें उनके अनमोल दोहे, जीवन भर आएंगे काम

Tue, 11 Feb 2025 04:56 PM IST
ज्योति मेहरा धर्म डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

माघ पूर्णिमा के दिन संत रविदास जयंती मनाई जाती है। उन्होंने अपने उपदेशों के माध्यम से समाज को बिना भेदभाव के प्रेम और एकता की सीख दी, जिसके कारण वे भक्ति मार्ग के प्रमुख संतों में गिने जाते हैं।
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संत रविदास जी के अनमोल वचन - फोटो : Amar Ujala
Ravidas Jayanti 2025: हिंदू पंचांग के अनुसार माघ पूर्णिमा के दिन संत रविदास जयंती मनाई जाती है। इस वर्ष यह पर्व 12 फरवरी को मनाया जा रहा है। संत रविदास का जन्म वाराणसी के पास एक गांव में हुआ था। वे न केवल एक आध्यात्मिक गुरु थे, बल्कि समाज में समानता और प्रेम का संदेश देने वाले महान समाज सुधारक भी थे।

इस शुभ अवसर पर विभिन्न स्थानों पर शोभा यात्राएं निकाली जाती हैं और भजन-कीर्तन के माध्यम से उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की जाती है। संत रविदास को लोग अलग-अलग नामों से जानते हैं, जैसे कि गुरु रविदास, रैदास, और रोहिदास। उन्होंने अपने उपदेशों के माध्यम से समाज को बिना भेदभाव के प्रेम और एकता की सीख दी, जिसके कारण वे भक्ति मार्ग के प्रमुख संतों में गिने जाते हैं।
 

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संत रविदास जी के अनमोल वचन - फोटो : Amar Ujala
संत रविदास के अनमोल दोहे
1. "करम बंधन में बन्ध रहियो फल की ना तज्जियो आस 
कर्म मानुष का धर्म है सत् भाखै रविदास।।"

अर्थ: हमें अपने कर्म को पूरी निष्ठा के साथ करते रहना चाहिए, और उसके फल की अपेक्षा नहीं करनी चाहिए। कर्म करना मनुष्य का धर्म है, और फल प्राप्त होना भाग्य पर निर्भर करता है।
 
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संत रविदास जी के अनमोल वचन - फोटो : Amar Ujala
2. "कृस्न, करीम, राम, हरि, राघव, जब लग एक न पेखा।
वेद कतेब कुरान, पुरानन, सहज एक नहिं देखा।।"

अर्थ: भले ही लोग अलग-अलग नामों से ईश्वर की पूजा करें, परंतु सत्य यही है कि सभी धार्मिक ग्रंथों में एक ही ईश्वर की महिमा का गुणगान किया गया है।
 

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संत रविदास जी के अनमोल वचन - फोटो : Amar Ujala
3. "रविदास जन्म के कारनै होत न कोउ नीच 
नकर कूं नीच करि डारि है ओछे करम की कीच"

अर्थ: मनुष्य की महानता या निम्नता उसके जन्म से नहीं, बल्कि उसके कर्मों से तय होती है। अच्छे कर्म व्यक्ति को ऊँचा उठाते हैं, जबकि बुरे कर्म उसे नीचे गिराते हैं।
 
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संत रविदास जी के अनमोल वचन - फोटो : Amar Ujala
4. "ब्राह्मण मत पूजिए जो होवे गुणहीन 
पूजिए चरण चंडाल के जो होने गुण प्रवीन।।"

 
अर्थ: किसी व्यक्ति की पूजा केवल उसके जन्म के आधार पर नहीं करनी चाहिए, बल्कि उसके गुणों को देखकर ही उसका सम्मान करना चाहिए।

 
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संत रविदास जी के अनमोल वचन - फोटो : Amar Ujala
5. "जाति- जाति में जाति हैं जो केतन के पात रैदास 
मनुष ना जुड़ सके जब तक जाति न जात।।"

अर्थ: समाज में जब तक जात-पात का भेदभाव रहेगा, तब तक लोग एकता से नहीं जुड़ सकते। जातिगत भेदभाव इंसानियत के विकास में सबसे बड़ी बाधा है।
 

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डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): ये लेख लोक मान्यताओं पर आधारित है। यहां दी गई सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है।
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