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Atal Bihari Vajpayee Anniversary: रामचरितमानस मेरी प्रेरणा का स्रोत है

Wed, 25 Dec 2019 05:04 AM IST
योगेश जोशी धर्म डेस्क, अमर उजाला
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अटल बिहारी जी धार्मिक विचारधाराओं में आस्था रखने वाले व्यक्ति थे। धार्मिक ग्रंथों को उन्होंने प्रेरणा के रूप में देखा और परंपराओं को सदैव ही सम्मान किया। धर्म की कट्टरता पर उन्होंने कभी जोर नहीं दिया उन्होंने देशभक्ति को सर्वोपरि रखा। धार्मिक विचार हमेशा अटल जी के मार्गदर्शन बने। अटल जी के अनुसार हमें अपने कर्म अच्छे रखने चाहिए और ईमानदारी से अपना कार्य करना चाहिए और जीवन में हमेशा सत्य का साथ देना चाहिए, राह कैसी भी हो सत्य का साथ नहीं छोड़ना चाहिए। आज उनके जन्मदिवस के उपलक्ष में जानते हैं उनके धार्मिक विचार।
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  • हिंदू परंपरा में गर्व महसूस करता हूं लेकिन मुझे भारतीय परंपरा में और ज्यादा गर्व है। अटल जी के देश सबसे पहले था और सब बाद में। 
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  • रामचरितमानस’ तो मेरी प्रेरणा का स्रोत रहा है। जीवन की समग्रता का जो वर्णन गोस्वामी तुलसीदास ने किया है, वैसा विश्व-साहित्य में नहीं हुआ है। भारत के सबसे पवित्र ग्रंथ रामचरितमानस सभी के लिए प्रेरणा स्रोत है, एक बेहतर जीवन जीने के लिए हमें रामचरितमानस से बहुत कुछ सीखने को मिलता है। 

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  • परमात्मा एक ही है, लेकिन उसकी प्राप्ति के अनेकानेक मार्ग हैं।
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  • देश एक मंदिर है, हम पुजारी हैं। राष्ट्र देव की पूजा में हमें अपने को समर्पित कर देना चाहिए।
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  • अहिंसा की भावना उसी में होती है, जिसकी उरात्मा में सत्य बैठा होता है, जो समभाव से सभी को देखता है। सत्य काफी महत्वपूर्ण है।
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Atal Bihari Vajpayee
  • सभ्यता कलेवर है, संस्कृति उसका अन्तरंग। सभ्यता सूल होती है, संस्कृति सूक्ष्म । सभ्यता समय के साथ बदलती है, किंतु संस्कृति अधिक स्थायी होती है।  
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