योगिनी एकादशी के दिन की पूजा विशेष फलदायक मानी जाती हैं।
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योगिनी एकादशी का महत्व
ब्रह्म विवर्त पुराण में योगिनी एकादशी व्रत की कथा का उल्लेख मिलता है। यह व्रत विशेष रूप से बीमारियों और शारीरिक कष्टों को दूर करने वाला माना जाता है। उत्तर भारतीय हिंदी पंचांग के अनुसार, यह व्रत आषाढ़ महीने के कृष्ण पक्ष में पड़ता है और इसका विशेष धार्मिक महत्व है। भगवान श्रीकृष्ण ने धर्मराज युधिष्ठिर को योगिनी एकादशी के महत्व के बारे में विस्तार से समझाया था। हिंदू धर्म में उपवास को आत्मा को ब्रह्म से जोड़ने का माध्यम माना जाता है। इसलिए नियमों और शास्त्रीय मानदंडों का पालन करते हुए एकादशी व्रत से मिलने वाले आध्यात्मिक और सांसारिक लाभों पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए। इस दिन उपवास करने वाले व्यक्ति को विशेष पूजा-अर्चना करनी चाहिए, जिसमें लक्ष्मी पूजा, कुबेर पूजा, कनकधारा पूजा और लक्ष्मी-नारायण पूजा शामिल हैं। यदि किसी को आर्थिक या व्यवसायिक समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है तो योगिनी एकादशी के दिन ये पूजा विशेष फलदायक मानी जाती हैं।
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