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जानिए नए विक्रम संवत् की शुरुआत हमेशा नवरात्रि से ही क्यों होती है

Wed, 14 Mar 2018 02:11 PM IST
धर्म डेस्क, अमर उजाला
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हिन्दू नववर्ष की शुरुआत प्रत्येक वर्ष चैत्र शुक्ल प्रतिपदा तिथि से होती है। इसी तिथि से नया संवत् आरंभ हो जाता है। संवत् की शुरुआत होने के साथ ही नौ दिनों तक चलने वाला दुर्गा उपासना का व्रत नवरात्रि भी शुरू हो जाता है। क्या आप जानते हैं नया संवत् की शुरुआत चैत्र नवरात्रि के आरंभ होने पर ही क्यों होती है। क्या है इसके पीछे की वजह आइए जानते हैं।
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दरअसल इसका कारण ब्रह्राा जी है। ब्रह्राा जी ने सृष्टि की रचना का काम इसी दिन से शुरु किया था और इसकी प्रेरणा ब्रह्रााजी को भगवान विष्णु ने दी थी।
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देवी पुराण के अनुसार सृष्टि के आरंभ से पहले अंधकार का राज था। उस समय आदि शक्ति जगदम्बा देवी कुष्मांडा के रूप में तमाम वनस्पतियों और दूसरी चीजों को संभालकर सूर्य मंडल के बीच में विराजमान थी। सृष्टि रचना का जब समय आया तो माता ने ही ब्रह्रा,विष्णु और भगवान शिव की रचना की।

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इसके बाद सत, रज और तम गुणों से तीन देवी लक्ष्मी, सरस्वती और काली प्रगट हुई। आदि शक्ति की कृपा से ही ब्रह्रााजी सृष्टि के रचयिता बने जबकि भगवान विष्णु पालनकर्ता और शिवजी संहारकर्ता बने।
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देवी की कृपा से ही सृष्टि निर्माण का काम पूरा हुआ इसलिए सृष्टि के आरंभ की तिथि के दिन से नौ दिनों तक आदिशक्ति के नौ रूपों की पूजा की जाती है। जिस तरह सृष्टि निर्माण का कार्य सफल हुआ उसी प्रकार नया संवत् भी सफल और सुखद रहें ऐसी कामना की जाती है।
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