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Shardiya Navratri 2025: नवरात्रि में नींबू खाने से क्यों मना किया जाता है? जानें क्या है इसके पीछे की मान्यता

Mon, 22 Sep 2025 06:37 AM IST
शिखर बरनवाल धर्म डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

नवरात्रि व्रत में नींबू का सेवन वर्जित माना जाता है। इसका सबसे बड़ा कारण है कि नींबू अत्यधिक खट्टा होता है, जो साधना में बाधा डाल सकता है। यह आध्यात्मिक ऊर्जा को प्रभावित कर सकता है। आइए इस लेख में इसी के बारे में विस्तार से जानते हैं।
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नवरात्रि - फोटो : Adobe Stock
Is lemon Rajasic or Sattvic?: शारदीय नवरात्रि इस वर्ष 22 सितंबर से शुरू हो रही है। इस त्योहार में भक्तगण नौ दिनों तक व्रत रखकर मां दुर्गा की उपासना करते हैं। इस दौरान सात्विकता का विशेष ध्यान रखा जाता है और खान-पान के कुछ कड़े नियम होते हैं। व्रत में आमतौर पर अनाज, मांस, मदिरा, लहसुन-प्याज जैसी चीजों से परहेज किया जाता है। लेकिन कई मान्यताओं में नींबू जैसे खट्टे फल का सेवन भी वर्जित बताया गया है। 

अक्सर लोग इस बात को लेकर असमंजस में रहते हैं कि सेहत के लिए फायदेमंद माने जाने वाले नींबू को व्रत में खाने के लिए क्यों मना किया जाता है। पौराणिक मान्यताओं के मुताबिक नवरात्रि में नींबू खाने के लिए मना किया जाता है। इसके पीछे कोई एक ठोस कारण नहीं, बल्कि धार्मिक और पारंपरिक मान्यताएं जुड़ी हुई हैं, जो तन और मन की शुद्धि पर जोर देती हैं। आइए इस लेख में इसी के बारे में जानते हैं।
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नींबू के उपाय - फोटो : adobe stock
आयुर्वेद और भोजन की प्रकृति
आयुर्वेद के अनुसार, भोजन को तीन श्रेणियों में बांटा गया है- सात्विक, राजसिक और तामसिक। नवरात्रि के व्रत में केवल सात्विक भोजन करने की सलाह दी जाती है, क्योंकि यह मन को शांत और एकाग्र रखता है। नींबू स्वाद में अत्यधिक खट्टा होता है, और ऐसे तीव्र स्वाद वाले खाद्य पदार्थों को राजसिक श्रेणी में रखा जाता है। माना जाता है कि राजसिक भोजन शरीर में उत्तेजना और इच्छाओं को बढ़ाता है, जो ध्यान और साधना में बाधा डाल सकता है।

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नवरात्रि - फोटो : Adobe Stock
आध्यात्मिक ऊर्जा पर प्रभाव
धार्मिक और पारंपरिक मान्यताओं के अनुसार, नवरात्रि के नौ दिन पूरी तरह से देवी को समर्पित होते हैं। इस दौरान भक्त अपनी आध्यात्मिक ऊर्जा को बढ़ाने का प्रयास करते हैं। ऐसा माना जाता है कि नींबू जैसे अत्यधिक खट्टे या तेज स्वाद वाले पदार्थ इस आध्यात्मिक ऊर्जा के प्रवाह को बाधित कर सकते हैं। इसलिए, देवी को प्रसन्न करने और व्रत की सात्विकता बनाए रखने के लिए हल्के और सौम्य खाद्य पदार्थों को प्राथमिकता दी जाती है।

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नवरात्रि - फोटो : Adobe Stock
व्रत के दौरान स्वास्थ्य कारण
व्रत के दौरान कई लोग दिन में केवल एक बार भोजन करते हैं या लंबे समय तक भूखे रहते हैं। ऐसे में नींबू या नींबू पानी का सेवन करने से कुछ लोगों को एसिडिटी या पेट में जलन की समस्या हो सकती है। नींबू में साइट्रिक एसिड की मात्रा अधिक होती है, जो खाली पेट में गैस या अन्य पाचन संबंधी परेशानी पैदा कर सकता है, जिससे व्रत रखने वाले को असुविधा हो सकती है।
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नवरात्रि - फोटो : Adobe Stock
सात्विकता पर है पूरा जोर
नवरात्रि में नींबू न खाने की परंपरा का मुख्य उद्देश्य व्रत की सात्विकता को बनाए रखना है। इसका मतलब यह नहीं है कि नींबू एक अशुद्ध फल है, बल्कि इसका राजसिक गुण और अम्लीय प्रकृति व्रत के आध्यात्मिक और शारीरिक अनुशासन के अनुकूल नहीं मानी जाती। व्रत का लक्ष्य तन-मन को शुद्ध कर पूरी तरह से देवी की भक्ति में लीन होना है, और ये नियम इसी में मदद करते हैं।


डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): यहां दी गई जानकारी सामान्य मान्यताओं, ज्योतिष, पंचांग, धार्मिक ग्रंथों आदि पर आधारित है। यहां दी गई सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है।

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