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जानिए कौन हैं वनस्पतिदेव, किन लोगों को देते हैं ये दंड

Mon, 08 Feb 2021 12:43 PM IST
Shashi Shashi धर्म डेस्क, अमर उजाला
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वनस्पति (प्रतीकात्मक तस्वीर) - फोटो : Social Media
जीवन जीने के लिए धरती पर जीवों को प्रत्येक चीज प्रकृति से ही प्राप्त होती है। फल, फूल, सब्जी, कंद-मूल, औषधियां, जड़ी-बूटी, मसाले, अनाज, जल आदि सभी चीजें हमें प्रकृति से ही प्राप्त होते ही हैं। सनातन धर्म में भी प्रकृति का बहुत महत्व बताया गया है। हिन्दू धर्म के कई त्योहार प्रकृति से ही जुड़े हुए हैं। प्रकृति से हमें फल, फूल, सब्जी, कंद-मूल, औषधियां, जड़ी-बूटी, मसाले, अनाज, जल आदि सभी प्राप्त होते ही हैं। हिंदू धर्म में माता पार्वती को ही प्रकृति माना गया है। वे ही सारी प्रकृति की रक्षा करती हैं। इसी तरह के वनस्पतिदेव हैं ये सभी वनस्पतियों की रक्षा करते हैं। तो चलिए जानते हैं वनस्पतिदेव की उत्पत्ति कैसे हुई और ये किन लोगों को दंड देते हैं।
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : अमर उजाला
वेदों में भी मिलता है वनस्पति देव का उल्लेख
जिस तरह से अनल देव, वायु देव, सोम देव आदि देव हैं उसी प्रकार से वनस्पतिदेव हैं। पुराणों के अनुसार दस विश्व देव हैं, वनस्पतिदेव को भी दस विश्वदेवों में से एक माना गया है। हिंदू सनातन धर्म के चार वेद हैं. जिनमें से ऋग्वेद और सामवेद में वनस्पति देव का उल्लेख मिलता है।
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : अमर उजाला
वनस्पति देव के कर्तव्य
वनस्पति देव वृक्ष, पौधों, लताओं और वनस्पतियों का पोषण-भरण, रक्षा और उनके अनुशासन के प्रति अपने कर्तव्यों का निर्वहन करते हैं।

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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : dailymail
जानिए कैसे हुई वनस्पति देव की उत्पत्ति
वनस्पति देव की उत्पत्ति (हिरण्यगर्भा ब्रह्म) के केशों से मानी जाती है। ब्रह्म का तेजस रूप ब्रह्मा जी हैं। हिरण्यगर्भा ब्रह्म का अर्थ हैं हिरण्यगर्भ यानि सोने के अंडे के भीतर रहने वाला अर्थात् पूर्ण शुद्ध ज्ञान, को हिरण्य कहा जाता है, चैतन्य ज्ञान के गर्भ में रहने वाला हिरण्यगर्भा ब्रह्म होता है।
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प्रतीकात्मक तस्वीर
किसे देते हैं वनस्पति देव दंड
जो लोग सूर्यास्त के बाद, ग्रहणकाल में या फिर निषेध तिथियों पर वनस्पतियों को किसी भी प्रकार से भंग करते हैं, उन्हें वनस्पतिदेव दंडित करते हैं। 
 
जो लोगो वनस्पति को अकारण नुकसान पहुंचाते हैं और वनस्पितियों का अपमान करते हैं, उन्हें वनस्पतिदेव दंड देते हैं।
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