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चातुर्मास खत्म होते ही शुरू होंगे मांगलिक कार्य, नवंबर-दिसंबर में गूंजेंगी शहनाइयां

Tue, 22 Sep 2026 12:23 PM IST
श्वेता सिंह धर्म डेस्क, अमर उजाला

सार

चातुर्मास समाप्त होते ही एक बार फिर मांगलिक कार्यों और विवाह समारोहों की शुरुआत होगी। नवंबर-दिसंबर 2026 में शादी के लिए कौन-कौन सी तिथियां शुभ रहेंगी, जानें विवाह के शुभ मुहूर्त और खास जानकारी।
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चातुर्मास 2026 - फोटो : AI

हर साल आने वाला चातुर्मास हिंदू और जैन दोनों धर्मों में विशेष धार्मिक महत्व रखता है। यह अवधि पूजा-पाठ, साधना और आध्यात्मिक गतिविधियों के लिए बेहद महत्वपूर्ण मानी जाती है। हालांकि, चातुर्मास के दौरान विवाह समेत कई तरह के मांगलिक कार्यों को करने से परहेज किया जाता है। इसी वजह से लोग इस अवधि के समाप्त होने का इंतजार करते हैं। साल 2026 में चातुर्मास की शुरुआत 25 जुलाई से हुई थी। अब 21 नवंबर 2026 को चातुर्मास का समापन होगा। इसके बाद एक बार फिर विवाह और अन्य शुभ कार्यों का सिलसिला शुरू होने की मान्यता है। चातुर्मास समाप्त होते ही शादी-विवाह की तैयारियां शुरू हो जाएंगी और विवाह योग्य लोगों के लिए शुभ मुहूर्त उपलब्ध होंगे।

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Chaturmas 2026 - फोटो : istock

2026 में कब समाप्त होगा चातुर्मास?
पंचांग के अनुसार, वर्ष 2026 में चातुर्मास 25 जुलाई से शुरू होकर 21 नवंबर 2026 तक रहेगा। 21 नवंबर को देवउठनी एकादशी के अवसर पर भगवान विष्णु के योगनिद्रा से जागने की मान्यता है। इसके साथ ही मांगलिक कार्यों के लिए शुभ समय की शुरुआत मानी जाती है।

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चातुर्मास में क्यों नहीं किए जाते मांगलिक कार्य? - फोटो : Adobe Stock

चातुर्मास में क्यों नहीं किए जाते मांगलिक कार्य?
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, चातुर्मास की अवधि भगवान विष्णु के योगनिद्रा में रहने से जुड़ी है। इस दौरान भक्त भगवान विष्णु की आराधना, व्रत और धार्मिक साधना करते हैं। मान्यता है कि इस समय विवाह, मुंडन, उपनयन संस्कार, गृह प्रवेश और नए वाहन जैसी शुभ गतिविधियों को टालना चाहिए। चातुर्मास के दौरान धार्मिक साधना और संयम को विशेष महत्व दिया जाता है। इसी कारण इस अवधि में मांगलिक आयोजनों के बजाय पूजा-पाठ और आध्यात्मिक कार्यों पर अधिक ध्यान दिया जाता है।

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नवंबर 2026 में विवाह के शुभ मुहूर्त - फोटो : अमर उजाला

नवंबर 2026 में विवाह के शुभ मुहूर्त
चातुर्मास समाप्त होने के बाद नवंबर 2026 में विवाह के लिए कुछ शुभ तिथियां उपलब्ध रहेंगी। इनमें प्रमुख तिथियां इस प्रकार हैं:

  • 21 नवंबर 2026, शनिवार: सुबह 06:44 बजे से 22 नवंबर की सुबह 12:08 बजे तक, रेवती नक्षत्र।
  • 24 नवंबर 2026, मंगलवार: रात 11:25 बजे से 25 नवंबर की सुबह 06:47 बजे तक, रोहिणी नक्षत्र।
  • 25 नवंबर 2026, बुधवार: सुबह 06:47 बजे से 26 नवंबर की सुबह 06:48 बजे तक।
  • 26 नवंबर 2026, गुरुवार: सुबह 06:48 बजे से शाम 05:47 बजे तक।
 
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दिसंबर 2026 में विवाह के शुभ मुहूर्त - फोटो : Adobe Stock
दिसंबर 2026 में विवाह के शुभ मुहूर्त
दिसंबर 2026 में भी विवाह के लिए कुछ शुभ अवसर मिलेंगे। इस महीने विवाह के लिए प्रमुख शुभ तिथियां हैं:
  • 2 दिसंबर 2026, बुधवार: नवमी और दशमी तिथि।
  • 3 दिसंबर 2026, गुरुवार: उत्तर फाल्गुनी और हस्त नक्षत्र।
  • 4 दिसंबर 2026, शुक्रवार: एकादशी तिथि।
  • 5 दिसंबर 2026, शनिवार: द्वादशी और त्रयोदशी तिथि।
  • 6 दिसंबर 2026, रविवार: त्रयोदशी तिथि।
  • 11 दिसंबर 2026, शुक्रवार: तृतीया तिथि।
  • 12 दिसंबर 2026, शनिवार: तृतीया और चतुर्थी तिथि।
 
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प्रतिदिन ध्यान, योग, जप और साधना के लिए समय निकालें तथा आत्मसंयम का अभ्यास करें। - फोटो : freepik
चातुर्मास में क्या करें 
  • अपनी क्षमता के अनुसार व्रत या फलाहार करें और सात्त्विक भोजन का सेवन करें। राजसिक और तामसिक भोजन से बचें।
  • प्रतिदिन ध्यान, योग, जप और साधना के लिए समय निकालें तथा आत्मसंयम का अभ्यास करें।
  • इंद्रियों पर नियंत्रण रखते हुए ब्रह्मचर्य और सदाचार का पालन करें।
  • अनावश्यक बातचीत से बचें और मन की शांति व आत्मचिंतन के लिए कुछ समय मौन रहें।
  • प्रातः जल्दी उठें, नियमित स्नान करें और रात में समय पर सोने की आदत रखें।
  • सुबह-शाम पूजा, प्रार्थना या संध्यावंदन करें और भगवान विष्णु सहित अन्य देवी-देवताओं का श्रद्धापूर्वक स्मरण करें।
  • संतों और धार्मिक विद्वानों के सत्संग में शामिल हों तथा आध्यात्मिक ज्ञान और अच्छे विचारों को जीवन में अपनाएँ।
  • अपनी सामर्थ्य के अनुसार जरूरतमंदों की सहायता करें और अन्न, वस्त्र या अन्य उपयोगी वस्तुओं का दान करें।
  • अपनी धार्मिक परंपरा और विधि के अनुसार यज्ञोपवीत धारण करें या उसका नवीनीकरण करें।
  • अपनी परंपरा के अनुसार पितरों के निमित्त तर्पण आदि धार्मिक कर्म श्रद्धापूर्वक करें।
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चातुर्मास में क्यों न करें - फोटो : adobe stock

चातुर्मास में क्यों न करें 

  • चातुर्मास के दौरान विवाह, गृहप्रवेश, जातकर्म आदि मांगलिक एवं शुभ संस्कार सामान्यतः नहीं किए जाते।
  • इस अवधि में बाल और दाढ़ी कटवाने से परहेज करने की परंपरा है।
  • क्रोध, ईर्ष्या, अहंकार, असत्य बोलने और कटु वचन कहने से बचना चाहिए।
  • यदि चातुर्मास का व्रत और नियम लिया हो, तो अनावश्यक यात्रा से बचने की परंपरा है।
  • व्यर्थ की बातचीत, झूठ, अनर्गल बातें और अनावश्यक मनोरंजन जैसी गतिविधियों से दूर रहना चाहिए।
  • तेल में बनी चीजों, अत्यधिक नमकीन-मसालेदार भोजन, मिठाई, सुपारी, मांस और मदिरा आदि का त्याग करने की परंपरा है।
  • चातुर्मास के अलग-अलग महीनों में कुछ विशेष खाद्य पदार्थों का त्याग भी किया जाता है, जैसे श्रावण में पत्तेदार सब्जियां, भाद्रपद में दही, आश्विन में दूध तथा कार्तिक में प्याज, लहसुन और उड़द की दाल।
डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): यहां दी गई जानकारी सामान्य मान्यताओं, ज्योतिष, पंचांग, धार्मिक ग्रंथों आदि पर आधारित है। यहां दी गई सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है।

 

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