पितरों से कुशा की अंगूठी का क्या संबंध है?
- फोटो : Amar Ujala
पितरों से कुशा की अंगूठी का क्या संबंध है?
धार्मिक मान्यताओं में कुशा को अत्यंत पवित्र माना गया है। एक पौराणिक कथा के अनुसार, जब गरुड़ देव अमृत लेकर आए थे, तब अमृत का कलश कुशा घास पर रखा गया था। इसी प्रसंग से कुशा को पवित्रता से जोड़कर देखा जाता है। ऐसी मान्यता भी है कि कुशा धारण करने से मन और शरीर की शुद्धता बनी रहती है। श्राद्ध जैसे धार्मिक कर्मों में इसे विशेष रूप से महत्वपूर्ण माना जाता है। परंपरागत मान्यताओं में अनामिका उंगली को ऊर्जा के प्रवाह से भी जोड़ा गया है। इसी कारण पूजा और श्राद्ध कर्म के दौरान इस उंगली में कुशा की पवित्री पहनने की परंपरा बताई जाती है। श्राद्ध में तर्पण और पिंडदान के दौरान कुशा का इस्तेमाल पितरों के प्रतीकात्मक माध्यम के रूप में भी किया जाता है। धार्मिक विश्वास के अनुसार, कुशा के माध्यम से अर्पित जल और अन्य सामग्री पितरों तक पहुंचती है। यही वजह है कि श्राद्ध कर्म में कुशा को महत्वपूर्ण स्थान दिया गया है।