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Vrishabha Sankranti 2021: वृषभ संक्रांति कल, जानें पूजा विधि और महत्व

Thu, 13 May 2021 12:24 PM IST
रुस्तम राणा धर्म डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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वृषभ संक्रांति 2021 - फोटो : Social media
धार्मिक मान्यता के अनुसार वृषभ संक्रांति को मकर संक्रांति के समान माना गया है। इस दिन पूजा-पाठ, जप, तप और दान का विशेष महत्व बताया गया है। इस साल वृषभ संक्रांति 14 मई शुक्रवार के दिन है। संक्रांति के दिन किसी पवित्र नदी अथवा जलकुंड में नहाने से तीर्थस्थलों के समान पुण्यफल प्राप्त होता है। आइए जानते हैं वृषभ संक्रांति की पूजा विधि और महत्व के बारे में।
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वृषभ संक्रांति पूजा विधि और मंत्र - फोटो : सोशल मीडिया
वृषभ संक्रांति पूजा विधि और मंत्र
वृषभ संक्रांति के दिन ब्रह्म बेला में उठें और घर की साफ-सफाई करें। इसके पश्चात स्नान ध्यान करें। कोरोना संक्रमण के चलते नदियों या सरोवरों में स्नान करना संभव नहीं है। ऐसी स्थिति में घर पर ही गंगाजल मिश्रित पानी से स्नान करें। इसके बाद सर्वप्रथम भगवान सूर्य देव को जल का अर्घ्य दें। अर्घ्य देते समय निम्न मंत्र का जरूर उच्चारण करें।
एहि सूर्य! सहस्त्रांशो! तेजो राशे! जगत्पते!
अनुकम्प्यं मां भक्त्या गृहाणार्घ्य दिवाकर!
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वृषभ संक्रांति में भगवान विष्णु जी की पूजा फल, फूल, धूप-दीप, दूर्वा आदि से करें। - फोटो : अमर उजाला।
भगवान विष्णु जी करें पूजा
भगवान विष्णु जी की पूजा फल, फूल, धूप-दीप, दूर्वा आदि से करें। इसके बाद जथा शक्ति तथा भक्ति के भाव से ब्राह्मणों एवं गरीबों को दान दें। आप दान में तंदुल, हल्दी, कंबल, मुद्रा आदि दे सकते हैं। दिन भर उपवास रखें। शाम में आरती अर्चना के बाद फलाहार कर सकते हैं। अगले दिन नित्य दिनों की तरह स्नान-ध्यान, पूजा आराधना के बाद व्रत खोलें।

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सूर्य का वृष राशि में गोचर 2021 - फोटो : सोशल मीडिया
वृषभ संक्रांति क्या है?
ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, सूर्य देव एक मास में एक राशि से दूसरी राशि में संचरण करते हैं। जब सूर्य देव एक राशि से दूसरी राशि में गोचर करते हैं तो इसे संक्रांति कहते हैं। वहीं जब सूर्य देव अपनी उच्च राशि राशि मेष से निकलकर वृष राशि में प्रवेश करते हैं तो इसे वृषभ संक्रांति कहते हैं। सूर्य के इस राशि परिवर्तन से मौसम में भी परिवर्तन देखने को मिलते हैं।
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शास्त्रों के अनुसार, वृषभ संक्रांति के दिन पूजा, जप, तप और दान करने से अमोघ फल की प्राप्ति होती है। - फोटो : अमर उजाला
वृषभ संक्रांति का महत्व
शास्त्रों के अनुसार, वृषभ संक्रांति के दिन पूजा, जप, तप और दान करने से अमोघ फल की प्राप्ति होती है। इस महीने में प्यासे को पानी पिलाने अथवा घर के बाहर प्याऊ लगाने से व्यक्ति को यज्ञ कराने के समतुल्य पुण्यफल मिलता है। इस दिन "ॐ नमो भगवते वासुदेवाय" मंत्र का एक मनके जाप जरूर करना चाहिए।
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वृषभ संक्रांति के दौरान सूर्य देव रोहिणी नक्षत्र में आते हैं और इस नक्षत्र में 15 दिनों तक रहते हैं इसमें शुरूआती नौ दिनों तक प्रचंड गर्मी पड़ती है। - फोटो : अमर उजाला
इस दौरान लगता है नौतपा 
वृषभ संक्रांति के दौरान सूर्य देव रोहिणी नक्षत्र में आते हैं और इस नक्षत्र में 15 दिनों तक रहते हैं इसमें शुरूआती नौ दिनों तक प्रचंड गर्मी पड़ती है। इन नौ दिनों को 'नवतपा' कहा जाता है। यदि इन नौ दिनों में किसी भी प्रकार से वर्षा न हो और न ही ठंठी हवा चले तो यह माना जाता है कि आने वाले दिनों में अच्छी बारिश हो सकती है।
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