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विवाह पंचमी 2019: विवाह पंचमी आज, जानें इस शुभ तिथि का महत्व एवं राम-सीता विवाह विधि

Sun, 01 Dec 2019 11:57 AM IST
योगेश जोशी धर्म डेस्क, अमर उजाला
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राम सीता विवाह
मार्गशीर्ष शुक्लपक्ष की पंचमी तिथि को बड़े ही धूम धाम से राजा राम सरकार का विवाहोत्सव मनाया जाता है। यह महोत्सव विशेष रूप से मिथलांचल में बहुत उत्साह के साथ मनाते हैं। त्रेता युग में पृथ्वी पर राक्षसों का अत्याचार अपनी चरम सीमा पर था। उस समय मुनि विश्वामित्र अपने यज्ञ की रक्षा करने के उद्देश्य से अयोध्या के महाराज दशरथ से उनके पुत्रों श्री राम एवं लक्ष्मण जी को मांग कर ले गए। यज्ञ की समाप्ति के पश्चात विश्वामित्र जी जनक पुरी के रास्ते से वापसी आने के समय राजा जनक के सीता स्वयंवर की उद्घोषणा की जानकारी मिली।

 
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राम, सीता और लक्ष्मण - फोटो : a
मुनि विश्वामित्र ने राम एवं लक्ष्मण जी को साथ लेकर सीता के स्वयंवर में पधारें। सीता स्वयंवर में राजा जनक जी ने उद्घोषणा की जो भी शिव जी के धनुष को भंग कर देगा उसके साथ सीता के विवाह का संकल्प कर लिया। स्वयंवर में बहुत राजा महाराजाओं ने अपने वीरता का परिचय दिया परन्तु विफल रहे।

इधर जनक जी चिंतित होकर घोषणा की लगता है यह पृथ्वी वीरों से विहीन हो गयी है , तभी मुनि विश्वामित्र ने  राम को शिव धनुष भंग करने का आदेश दिया। राम जी ने मुनि विश्वामित्र जी की आज्ञा मानकर शिव जी की मन ही मन स्तुति कर शिव धनुष को एक ही बार में भंग कर दिया।

उसके उपरान्त राजा जनक ने सीता का विवाह बड़े उत्साह एवं धूम धाम के साथ राम जी से कर दिया। साथ ही दशरथ के तीन पुत्रों भरत के साथ माध्वी, लक्ष्मण के साथ उर्मिला एवं शत्रुघ्न जी के साथ सुतकीर्ति का विवाह भी बड़े हर्ष एवं धूम धाम के साथ कर दिया।
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राम सीता
मार्गशीर्ष शुक्ल पंचमी को भगवान राम ने माता सीता के साथ विवाह किया था. श्रीराम विवाहोत्सव के रूप में मनाई जाने वाली इस तिथि को विवाह पंचमी भी कहते हैं. भगवान राम को चेतना और माता सीता को प्रकृति शक्ति का प्रतीक माना जाता है. चेतना और प्रकृति के मिलन की वजह से ही यह दिन महत्वपूर्ण हो जाता है. इस दिन भगवान राम और माता सीता का विवाह करवाने का भी बड़ा महत्व है. इस साल विवाह पंचमी 1 दिसंबर को मनाई जाएगी।

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मनचाहे वर-वधु के लिए विवाह पंचमी पर उपासना की जाती है
- विवाह पंचमी पर उपाय करने से शादी में आने वाली अड़चनें दूर हो जाती हैं।
- मनचाहे वर-वधु के लिए विवाह पंचमी पर उपासना की जाती है।
- वैवाहिक जीवन या घरेलू कलह का अंत भी हो जाता है।
- इस दिन बालकाण्ड में भगवान राम और सीता जी के विवाह प्रसंग का पाठ करना शुभ होता है।
- इस दिन सम्पूर्ण रामचरितमानस का पाठ करने से भी पारिवारिक जीवन सुखमय होता है।
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सुबह स्नान करके श्री राम विवाह का संकल्प लें
इस विधि से करवाएं राम-सीता का विवाह
- सुबह स्नान करके श्री राम विवाह का संकल्प लें।
- स्नान करके विवाह के कार्यक्रम का आरम्भ करें।
- श्रीराम और माता सीता की प्रतिकृति की स्थापना करें।
- भगवान राम को पीले और माता सीता को लाल वस्त्र अर्पित करें।
- इनके समक्ष बालकाण्ड में विवाह प्रसंग का पाठ करें।
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श्रीराम और माता सीता की प्रतिकृति की स्थापना करें
इन दोहों का जाप करने से मनोकामना पूरी होती है
1- प्रमुदित मुनिन्ह भावंरीं फेरीं। नेगसहित सब रीति निवेरीं॥
2- पानिग्रहन जब कीन्ह महेसा। हियं हरषे तब सकल सुरेसा॥
बेदमन्त्र मुनिबर उच्चरहीं। 
जय जय जय संकर सुर करहीं॥
3- सुनु सिय सत्य असीस हमारी। पूजिहि मन कामना तुम्हारी॥
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