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Vinayak Chaturthi 2021: इस बार की विनायक चतुर्थी है खास, जानें महत्व और पूजा विधि

Wed, 17 Mar 2021 07:37 AM IST
Shashi Shashi धर्म डेस्क, अमर उजाला
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विनायक चतुर्थी 2021 - फोटो : Pixabay
हिंदू कैलेंडर के अनुसार प्रत्येक मास के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि को विनायक चतुर्थी मनाई जाती है। यह दिन विघ्नहर्ता भगवान श्री गणेश को समर्पित किया जाता है। इस बार फाल्गुन माह के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि यानी 17 मार्च को पड़ रही है। इस बार की चतुर्थी तिथि बहुत ही खास है क्योंकि बुधवार का दिन गणेश जी का माना गया है और विनायक चतुर्थी भी बुधवार को पड़ रही है। इस दिन लोग व्रत करके विधि-विधान से गणपति बप्पा का पूजन करते हैं और उन्हें उनकी प्रिय चीजों का भोग लगाते हैं। गणेश जी अपने भक्तों के सारे विघ्न हर लेते हैं यही कारण है कि इन्हें विघ्नहर्ता, विघ्नविनाशक कहा जाता है। आप भी विनायक चतुर्थी पर व्रत और पूजन करके बप्पा की कृपा प्राप्त कर सकते हैं। तो चलिए जानते हैं विनायक चतुर्थी का शुभ मुहूर्त महत्व और व्रत पूजा विधि। 
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विनायक चतुर्थी 2021 - फोटो : Pixabay
विनायक चतुर्थी का शुभ मुहूर्त

फाल्गुन शुक्ल चतुर्थी तिथि आरंभ- 16 मार्च 2021 दिन मंगलवार रात 08 बजकर 58 मिनट से

फाल्गुन शुक्ल चतुर्थी तिथि समाप्त- 17 मार्च 2021 दिन बुधवार रात 11 बजकर 28 मिनट तक

विनायक चतुर्थी पूजा का मुहूर्त- सुबह 11 बजकर 17 मिनट से लेकर दोपहर 01 बजकर 42 मिनट तक
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विनायक चतुर्थी 2021
विनायक चतुर्थी का महत्व
मान्यता के अनुसार जो मनुष्य पूरी श्रद्धा और नियम के साथ विनायक चतुर्थी का व्रत और पूजन करता है, भगवान गणेश उसकी हर मनोकामना को पूर्ण करते हैं। इस दिन व्रत और पूजन करने से कार्यों में आने वाली बाधाएं दूर होती हैं। गणेश जी अपने भक्तों से सारे विघ्नों को हर लेते हैं। आपके जीवन में सुख और शांति का वास होता है। 
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विनायक चतुर्थी 2021
विनायक चतुर्थी पूजा विधि-
  • चतुर्थी तिथि पर घर की साफ-सफाई करके सर्वप्रथम स्नान करें। 
  • इस दिन हो सके तो पीले या फिर लाल रंग के वस्त्र धारण करें। 
  • एक लकड़ी के पाटे या चौकी पर भगवान गणेश  को आसन बिछाकर विराजमान करें।
  • पूर्वमुख या उत्तर दिशा की ओर मुख करके पूजन आरंभ करें।
  • गणपति बप्पा के सामने धूप दीप जलाएं।
  • इसके बाद अक्षत, पुष्प और फल आदि अर्पित करें।
  • गणेश जी को दूर्वा बहुत प्रिय है इसलिए गणेश जी को दूर्वा की 21 गांठे अर्पित करें।
  • गणेश जी को लड्डू या तिल के बने मिष्ठान को भोग लगाएं। 
  • गणेश जी की आरती करें।
  • इसके बाद गणेश जी के ''ॐ गणेशाय नमः'' या ''ॐ गं गणपते नमः'' मंत्रों का जाप करें। 
  • संध्या के समय कथा पढ़े और चांद को अर्घ्य देकर व्रत का पारण करें।
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