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दशहरा 2026: विजयादशमी पर भूलकर भी न करें ये 5 काम, जानें दशहरे के जरूरी नियम

Mon, 19 Oct 2026 10:14 AM IST
श्वेता सिंह धर्म डेस्क, अमर उजाला

सार

दशहरा यानी विजयादशमी बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक है। इस दिन पूजा-पाठ और धार्मिक परंपराओं का विशेष महत्व माना जाता है। मान्यता है कि दशहरे पर कुछ गलतियों से बचना चाहिए। आइए जानें विजयादशमी 2026 पर कौन-से 5 काम भूलकर भी नहीं करने चाहिए और क्या हैं जरूरी नियम।
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विजयादशमी पूजा के नियम - फोटो : amar ujala

दशहरा हिंदू धर्म के प्रमुख त्योहारों में से एक है। इसे विजयादशमी के नाम से भी जाना जाता है। यह पर्व बुराई पर अच्छाई और अधर्म पर धर्म की जीत का संदेश देता है। हर साल अश्विन मास के शुक्ल पक्ष की दशमी तिथि को दशहरा मनाया जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इसी दिन भगवान श्रीराम ने लंकापति रावण का वध किया था। वहीं, देवी दुर्गा ने नौ दिनों तक चले युद्ध के बाद दसवें दिन महिषासुर का संहार किया था। इसी वजह से विजयादशमी को विजय, साहस और नई शुरुआत का प्रतीक माना जाता है। दशहरे के अवसर पर देश के अलग-अलग हिस्सों में रावण, मेघनाद और कुंभकर्ण के पुतलों का दहन किया जाता है। कई जगहों पर रामलीला का आयोजन होता है और मंदिरों में विशेष पूजा-अर्चना की जाती है। इस दिन शस्त्र पूजन की परंपरा भी है। मान्यता है कि विजयादशमी पर शुभ कार्यों की शुरुआत करना मंगलकारी होता है। हालांकि, धार्मिक परंपराओं में कुछ ऐसे कामों का भी उल्लेख मिलता है, जिन्हें इस दिन करने से बचने की सलाह दी जाती है। दशहरा 2026 में 20 अक्टूबर को मनाया जाएगा। ऐसे में अगर आप भी इस पर्व को पूरे विधि-विधान और श्रद्धा के साथ मनाना चाहते हैं, तो कुछ जरूरी बातों का ध्यान रखना चाहिए। आइए जानते हैं विजयादशमी के दिन किन कामों से बचने की सलाह दी जाती है और दशहरे से जुड़े प्रमुख धार्मिक नियम क्या हैं।

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तामसिक भोजन से करें परहेज - फोटो : इंस्टाग्राम
तामसिक भोजन और नशे से बचें
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, दशहरे के दिन सात्विक भोजन करना शुभ माना जाता है। इस दिन कई लोग मांस, मछली, अंडे और शराब जैसे पदार्थों का सेवन नहीं करते। कुछ परिवारों में प्याज और लहसुन से भी परहेज किया जाता है। मान्यता है कि त्योहार के दिन संयम और पवित्रता बनाए रखते हुए पूजा-अर्चना करनी चाहिए। हालांकि, खानपान से जुड़े नियम अलग-अलग परिवारों और परंपराओं के अनुसार बदल सकते हैं।
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किसी जीव या प्रकृति को नुकसान न पहुंचाएं - फोटो : अमर उजाला प्रिन्ट/एजेंसी
किसी जीव या प्रकृति को नुकसान न पहुंचाएं
विजयादशमी का पर्व धर्म और सदाचार की जीत का संदेश देता है। ऐसे में इस दिन पशु-पक्षियों को नुकसान पहुंचाने, उन्हें परेशान करने या पेड़-पौधों को बेवजह नुकसान पहुंचाने से बचना चाहिए। जीवों के प्रति दया और प्रकृति के प्रति संवेदनशीलता रखना अच्छे आचरण का हिस्सा है। त्योहार के दौरान भी स्वच्छता बनाए रखें और पर्यावरण को नुकसान पहुंचाने वाली गतिविधियों से दूर रहने का प्रयास करें।

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लड़ाई-झगड़े और अपमानजनक व्यवहार से बचें - फोटो : freepik
लड़ाई-झगड़े और अपमानजनक व्यवहार से बचें
दशहरे को सकारात्मकता और नई शुरुआत से जोड़ा जाता है। इसलिए इस दिन परिवार के सदस्यों, बुजुर्गों और अन्य लोगों के साथ सम्मानपूर्वक व्यवहार करने की सलाह दी जाती है। बेवजह बहस करना, कटु शब्द बोलना या किसी का अपमान करना रिश्तों में तनाव बढ़ा सकता है। कोशिश करें कि आपसी मतभेदों को शांतिपूर्वक सुलझाएं और दूसरों के प्रति विनम्रता बनाए रखें। धार्मिक दृष्टि से भी अच्छे व्यवहार और सदाचार को महत्वपूर्ण माना जाता है।
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दान करते समय रखें इन बातों का ध्यान - फोटो : adobe stock
दान करते समय रखें इन बातों का ध्यान
हिंदू परंपरा में त्योहारों पर जरूरतमंदों की सहायता और दान-पुण्य का विशेष महत्व माना जाता है। दशहरे पर भी अपनी क्षमता के अनुसार भोजन, अनाज, कपड़े या उपयोगी वस्तुओं का दान किया जा सकता है। कुछ स्थानीय मान्यताओं में हल्दी, चमड़े से बनी वस्तुओं या फटे-पुराने कपड़ों का दान करने से बचने की सलाह दी जाती है। हालांकि, ये नियम सभी परंपराओं में समान नहीं हैं। दान करते समय वस्तु की उपयोगिता, स्वच्छता और प्राप्त करने वाले व्यक्ति की जरूरत का ध्यान रखना अधिक महत्वपूर्ण है।
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शाम के समय लेन-देन को लेकर प्रचलित मान्यताओं का ध्यान रखें - फोटो : Adobe Stock
शाम के समय लेन-देन को लेकर प्रचलित मान्यताओं का ध्यान रखें
कुछ पारंपरिक मान्यताओं के अनुसार, त्योहारों की शाम को सुई, नमक या चीनी जैसी वस्तुएं दूसरों को देने से बचने की सलाह दी जाती है। यह एक लोक-मान्यता है, कोई सार्वभौमिक धार्मिक नियम नहीं। ऐसी मान्यताएं अलग-अलग क्षेत्रों और परिवारों में भिन्न हो सकती हैं। इसलिए इन्हें अंधविश्वास या निश्चित परिणाम से जोड़ने के बजाय अपनी पारिवारिक परंपरा के संदर्भ में समझना चाहिए।
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दशहरा पर शस्त्र पूजा क्यों की जाती है? - फोटो : AI
दशहरे पर शस्त्र पूजा करना न भूलें
विजयादशमी पर शस्त्र पूजन की परंपरा कई क्षेत्रों में प्रचलित है। पुराने समय में योद्धा इस दिन अपने हथियारों की पूजा करते थे। आज भी कई लोग अपने काम में इस्तेमाल होने वाले औजारों, वाहनों और उपकरणों की साफ-सफाई करके उनका सम्मान करते हैं। इसे मेहनत, कर्तव्य और कार्य के प्रति समर्पण के प्रतीक के रूप में देखा जा सकता है। यदि आप शस्त्रों या औजारों की पूजा करते हैं, तो सुरक्षा के नियमों का पालन करते हुए ही यह अनुष्ठान करें।

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डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): यहां दी गई जानकारी सामान्य मान्यताओं, ज्योतिष, पंचांग, धार्मिक ग्रंथों आदि पर आधारित है। यहां दी गई सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है।
 
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