विजया एकादशी 2021(प्रतीकात्मक तस्वीर)
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एकादशी व्रत पूजन विधि
हर एकादशी की तरह विजया एकादशी के व्रत का नियम भी दशमी तिथि से ही आरंभ हो जाता है। इसलिए एकादशी के एक दिन पहले दूसरे प्रहर के बाद रात्रि में भोजन नहीं करना चाहिए, ताकि आपके पेट में अन्न का अंश न रहे।
- एकादशी को प्रातः उठकर स्नानादि करने के पश्चात माता एकादशी और भगवान विष्णु का ध्यान देते हुए व्रत का संकल्प करें।
- भगवान विष्णु के समक्ष धूप दीप प्रज्वलित करें।
- विष्णु जी को चंदन का तिलक लगाकर पुष्प अर्पित करें।
- पूजा संपन्न करके वहीं आसन पर बैठकर एकादशी व्रत का महातम्य पढ़ें या श्रवण करें।
- एकादशी के व्रत का पारण द्वादशी तिथि यानि एकादशी के अगले दिन किया जाता है।
द्वादशी तिथि पर प्रातः उठकर स्नानादि करने के पश्चात पूजा करें और भोजन बनाकर किसी जरूरतमंद या ब्राह्मण को खिलाएं। दान दक्षिणा देकर उन्हें सम्मान के साथ विदा करें। पारण मुहूर्त में स्वयं भी व्रत का पारण करें।