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Vat Savitri Vrat Niyam: वट सावित्री व्रत के दिन भूलकर भी न करें ये गलतियां, जानें पूजा के जरूरी नियम

Fri, 15 May 2026 04:25 PM IST
Shweta Singh धर्म डेस्क, अमर उजाला

सार

वट सावित्री व्रत 2026 पर सुहागिन महिलाओं को पूजा और व्रत के साथ कुछ खास नियमों का पालन करना चाहिए। जानें इस दिन क्या करना शुभ माना जाता है ताकि व्रत का पूरा फल और अखंड सौभाग्य का आशीर्वाद प्राप्त हो सके।

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वट सावित्री व्रत नियम - फोटो : amar ujala

Vat Savitri Vrat Niyam: हिंदू धर्म में वट सावित्री व्रत को अखंड सौभाग्य और सुखी वैवाहिक जीवन से जुड़ा अत्यंत महत्वपूर्ण व्रत माना गया है। यह व्रत विवाहित महिलाएं अपने पति की लंबी आयु, अच्छे स्वास्थ्य और दांपत्य जीवन में सुख-समृद्धि की कामना के लिए रखती हैं। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस दिन बरगद के वृक्ष की पूजा और सावित्री-सत्यवान कथा का श्रवण विशेष फलदायी माना जाता है। मान्यता है कि देवी सावित्री ने अपने पतिव्रत और दृढ़ संकल्प के बल पर यमराज से अपने पति सत्यवान के प्राण वापस प्राप्त किए थे। इसी कारण यह व्रत नारी शक्ति, समर्पण और अटूट प्रेम का प्रतीक माना जाता है। कहा जाता है कि इस दिन व्रत और पूजा के साथ कुछ विशेष नियमों और शुभ कार्यों का पालन करने से व्रत का फल और अधिक बढ़ जाता है। आइए जानते हैं कि वाट सावित्री व्रत के किन नियमों का पालन करना आवश्यक है। 

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वट सावित्री व्रत - फोटो : adobe stock
वट सावित्री व्रत के नियम और विधि 
  • सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और साफ-सुथरे पारंपरिक वस्त्र पहनें।
  • वट सावित्री व्रत के दिन सोलह श्रृंगार करना शुभ माना जाता है।
  • लाल और हरे रंग के कपड़े धारण करें।
  • व्रत रखकर बरगद के वृक्ष की पूजा करें।
  • वट वृक्ष की जड़ में जल अर्पित करें।
  • हल्दी, कुमकुम, सिंदूर, फूल और पूजन सामग्री चढ़ाएं।
  • मिठाई या प्रसाद का भोग लगाएं।
  • बरगद के पेड़ की सात बार परिक्रमा करते हुए कच्चा सूत लपेटें।
  • सावित्री-सत्यवान कथा का पाठ या श्रवण करें।
  • पूजा के बाद वट वृक्ष का पत्ता आशीर्वाद स्वरूप अपने पास रखें।
  • पति और घर के बड़े-बुजुर्गों का आशीर्वाद लें।
  • पति के साथ दीपक जलाकर पूजा करना शुभ माना जाता है।
 
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वट सावित्री तिथि
वट सावित्री तिथि  

वट सावित्री व्रत से जुड़ी पंचांग गणना के अनुसार वैशाख अमावस्या तिथि 16 मई 2026 को सुबह 5 बजकर 11 मिनट पर शुरू होगी और 17 मई 2026 को रात 1 बजकर 30 मिनट पर समाप्त होगी। उदया तिथि को मान्यता दिए जाने के कारण वट सावित्री व्रत 16 मई 2026, शनिवार के दिन रखा जाएगा।

इस दिन पूजा-पाठ के लिए सुबह 7:12 बजे से 8:24 बजे तक का समय शुभ माना गया है। वहीं अभिजीत मुहूर्त सुबह 11:50 बजे से दोपहर 12:45 बजे तक रहेगा। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस शुभ समय में पूजा और व्रत करने से विशेष पुण्य फल प्राप्त होता है।

 
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वट सावित्री पूजा - फोटो : अमर उजाला
वट अमावस्या व्रत की पूजन सामग्री 
पूजन सामग्री में कलावा, कच्चा सूत, सिंदूर, रोली, अक्षत, चंदन, फूल, सुपारी, धूप, दीपक, नारियल, पान के पत्ते, सात प्रकार के अनाज, श्रृंगार का सामान, मिठाई, जल से भरा कलश और वटवृक्ष की शाखा को विशेष रूप से शामिल किया जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इन सामग्रियों से विधि-विधान के साथ पूजा करने पर अखंड सौभाग्य, अच्छे स्वास्थ्य और सुख-समृद्धि का आशीर्वाद प्राप्त होता है।



डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): यहां दी गई जानकारी सामान्य मान्यताओं, ज्योतिष, पंचांग, धार्मिक ग्रंथों आदि पर आधारित है। यहां दी गई सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है।
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