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Varuthini Ekadashi: माता एकादशी की पूजा के बिना नहीं पूरा होगा यह व्रत, जानें पूजा विधि, भोग,मंत्र और आरती

Sat, 04 Apr 2026 06:53 PM IST
Shweta Singh धर्म डेस्क, अमर उजाला

सार

Vaishakh Ekadashi: वैशाख मास के कृष्ण पक्ष में पड़ने वाली एकादशी को वरुथिनी एकादशी के रूप में मनाया जाता है। यह दिन भगवान विष्णु और देवी एकादशी की पूजा-अर्चना के लिए समर्पित है। ऐसी मान्यता है कि इस व्रत को रखने से भक्तों को जीवन के कष्टों और दुखों से मुक्ति मिलती है।
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एकादशी की पूजा विधि - फोटो : amar ujala
Varuthini Ekadashi 2026 Puja Vidhi Mantra Bhog Aarti and Importance:  वैशाख मास के कृष्ण पक्ष में पड़ने वाली एकादशी को वरुथिनी एकादशी के रूप में मनाया जाता है। इस वर्ष, यह शुभ तिथि 13 अप्रैल 2026 को पड़ रही है। यह दिन भगवान विष्णु और देवी एकादशी की पूजा-अर्चना के लिए समर्पित है। ऐसी मान्यता है कि इस व्रत को रखने से भक्तों को जीवन के कष्टों और दुखों से मुक्ति मिलती है। परंतु, केवल उपवास रखना ही पर्याप्त नहीं है। माता एकादशी की विधि-विधान से पूजा करना अत्यंत आवश्यक है। यदि पूजा ठीक प्रकार से न की जाए, तो व्रत को अधूरा माना जाता है। इस दिन पूर्ण श्रद्धाभाव से पूजा करना और व्रत के नियमों का पालन करना अत्यंत महत्वपूर्ण है। इसी क्रम में आइए जानते हैं  पूजा विधि, भोग, मंत्र और आरती। 
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एकादशी माता पूजा विधि - फोटो : adobe
एकादशी माता पूजा विधि
  • इस दिन व्यक्ति को सुबह जल्दी उठना चाहिए, स्नान करना चाहिए और स्वच्छ वस्त्र धारण करना चाहिए। मन और शरीर दोनों को पवित्र रखना अत्यंत महत्वपूर्ण है।
  • जिस स्थान पर पूजा की जानी है, उसे गंगाजल या स्वच्छ जल से पवित्र करें।  
  • एक चौकी पर लाल या पीले रंग का वस्त्र बिछाना चाहिए।
  • इसके बाद श्री विष्णु और एकादशी माता की प्रतिमा या चित्र स्थापित करें।
  • पूजा की शुरुआत पूर्ण श्रद्धा के साथ की जानी चाहिए।
  • रोली, चंदन, अक्षत, धूप, दीप और पुष्प अर्पित करके देवता की आराधना करनी चाहिए।
  • भोग में तुलसी के पत्तों को अवश्य शामिल करना चाहिए, क्योंकि विष्णु भक्ति में तुलसी को अत्यंत पवित्र माना जाता है।
  • एकादशी व्रत कथा का पाठ करना या उसे सुनना अत्यंत शुभ माना जाता है।
  • श्री विष्णु और एकादशी माता से संबंधित मंत्रों का श्रद्धापूर्वक जाप करना चाहिए।
  • अंत में, आरती करनी चाहिए और परिवार के सभी सदस्यों में प्रसाद वितरित करना चाहिए।
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भगवान को भोग के रूप में केवल सात्विक भोजन ही अर्पित किया जा सकता है। - फोटो : Adobe stock
वरुथिनी एकादशी भोग
  • इस दिन भगवान को भोग के रूप में केवल सात्विक भोजन ही अर्पित किया जा सकता है।
  • भोग में मौसमी फल, पंचामृत, पीले रंग की मिठाइयाँ, मखाने की खीर, सूखे मेवे (ड्राई फ्रूट्स), दूध से बनी मिठाइयां और धनिया की पंजीरी शामिल की जा सकती है।
  • भोग में तुलसी के पत्तों को शामिल करना अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है।
  • इस दिन देवता को चावल या किसी भी प्रकार के अनाज से बना भोजन अर्पित नहीं करना चाहिए।

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पूजा मंत्र - फोटो : freepik
पूजा मंत्र
  • ॐ एकादशी देव्यै नमो नमः
  • ॐ नमो भगवते वासुदेवाय”
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एकादशी माता की आरती - फोटो : freepik

॥ एकादशी माता की आरती ॥

ॐ जय एकादशी, जय एकादशी,जय एकादशी माता।\
विष्णु पूजा व्रत को धारण कर,शक्ति मुक्ति पाता॥

ॐ जय एकादशी...॥

तेरे नाम गिनाऊं देवी,भक्ति प्रदान करनी।
गण गौरव की देनी माता,शास्त्रों में वरनी॥

ॐ जय एकादशी...॥

मार्गशीर्ष के कृष्णपक्ष की उत्पन्ना,विश्वतारनी जन्मी।
शुक्ल पक्ष में हुई मोक्षदा,मुक्तिदाता बन आई॥

ॐ जय एकादशी...॥

पौष के कृष्णपक्ष की,सफला नामक है।
शुक्लपक्ष में होय पुत्रदा,आनन्द अधिक रहै॥

ॐ जय एकादशी...॥

नाम षटतिला माघ मास में,कृष्णपक्ष आवै।
शुक्लपक्ष में जया, कहावै,विजय सदा पावै॥

ॐ जय एकादशी...॥

विजया फागुन कृष्णपक्ष मेंशुक्ला आमलकी।
पापमोचनी कृष्ण पक्ष में,चैत्र महाबलि की॥

ॐ जय एकादशी...॥

चैत्र शुक्ल में नाम कामदा,धन देने वाली।
नाम वरूथिनी कृष्णपक्ष में, वैशाख माह वाली॥

ॐ जय एकादशी...॥

शुक्ल पक्ष में होयमोहिनी अपरा ज्येष्ठ कृष्णपक्षी।
नाम निर्जला सब सुख करनी,शुक्लपक्ष रखी॥

ॐ जय एकादशी...॥

योगिनी नाम आषाढ में जानों,कृष्णपक्ष करनी।
देवशयनी नाम कहायो,शुक्लपक्ष धरनी॥

ॐ जय एकादशी...॥

कामिका श्रावण मास में आवै,कृष्णपक्ष कहिए।
श्रावण शुक्ला होयपवित्रा आनन्द से रहिए॥

ॐ जय एकादशी...॥

अजा भाद्रपद कृष्णपक्ष की,परिवर्तिनी शुक्ला।
इन्द्रा आश्चिन कृष्णपक्ष में,व्रत से भवसागर निकला॥

ॐ जय एकादशी...॥

पापांकुशा है शुक्ल पक्ष में,आप हरनहारी।
रमा मास कार्तिक में आवै,सुखदायक भारी॥

ॐ जय एकादशी...॥

देवोत्थानी शुक्लपक्ष की,दुखनाशक मैया।
पावन मास में करूँ विनती, पार करो नैया॥

ॐ जय एकादशी...॥

परमा कृष्णपक्ष में होती,जन मंगल करनी।
शुक्ल मास में होय पद्मिनी दुख दारिद्र हरनी॥

ॐ जय एकादशी...॥

जो कोई आरती एकादशी की,भक्ति सहित गावै।
जन गुरदिता स्वर्ग का वासा,निश्चय वह पावै॥

ॐ जय एकादशी...॥

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वरुथिनी एकादशी का महत्व
वरुथिनी एकादशी का महत्व
इस व्रत को करने से इंसान के पाप दूर होते हैं और आत्मा शुद्ध होती है। ऐसा माना जाता है कि जो लोग श्रद्धा से यह व्रत करते हैं, उन्हें मोक्ष का लाभ मिलता है। इस व्रत के प्रभाव से धन, यश और सफलता बढ़ती है। शास्त्रों में कहा गया है कि इससे मिलने वाला पुण्य कुंवारी कन्या के दान जितना होता है। यह व्रत खास तौर पर संतान प्राप्ति और परिवार की सुख-समृद्धि के लिए किया जाता है।



डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): यहां दी गई जानकारी सामान्य मान्यताओं, ज्योतिष, पंचांग, धार्मिक ग्रंथों आदि पर आधारित है। यहां दी गई सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है। 
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