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Varuthini Ekadashi 2021 Date: कब है वरुथिनी एकादशी, जानें तिथि, मुहूर्त, व्रत विधि और कथा

Wed, 28 Apr 2021 07:23 AM IST
रुस्तम राणा धर्म डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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वरुथिनी एकादशी 2021 - फोटो : अमर उजाला।
वैशाख मास कृष्ण पक्ष में पड़ने वाली एकादशी को वरुथिनी एकादशी के नाम से जाना जाता है। यह तिथि भगवान विष्णु जी को अति प्रिय है। इस दिन एकादशी व्रत रखा जाता है। शास्त्रों के अनुसार जो व्यक्ति वरूथिनी एकादशी व्रत का पालन विधि-विधान से करता है उसे वैकुंठ लोक की प्राप्ति होती है। व्रत करने वाले जातकों के समस्त प्रकार के पाप और कष्ट मिट जाते हैं। आइए जानते हैं वरुथिनी एकादशी की तिथि, मुहूर्त, व्रत विधि और कथा।
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वरुथिनी एकादशी 2021 - फोटो : अमर उजाला।
कब है वरुथिनी एकादशी व्रत?
इस साल वरुथिनी एकादशी व्रत 7 मई शुक्रवार के दिन रखा जाएगा।
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वरुथिनी एकादशी 2021 - फोटो : अमर उजाला
वरुथिनी एकादशी व्रत मुहूर्त
एकादशी तिथि आरंभ - 06 मई 2021 को दोपहर 02 बजकर 10 मिनट से
एकादशी तिथि समाप्त - 07 मई 2021 को शाम 03 बजकर 32 मिनट तक
द्वादशी तिथि समाप्त- 08 भी को शाम 05 बजकर 35 मिनट पर
एकादशी व्रत पारण समय- 08 मई को प्रातः 05 बजकर 35 मिनट से लेकर सुबह 08 बजकर 16 मिनट तक
पारण की कुल अवधि - 2 घंटे 41 मिनट

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वरुथिनी एकादशी 2021 - फोटो : सोशल मीडिया
वरुथिनी एकादशी पूजा विधि
  • वरुथिनी एकादशी के दिन सुबह प्रात: जल्दी उठ कर स्नान करें।
  • स्नान करने के बाद घर के मंदिर में दीपक जलाएं।
  • भगवान विष्णु की प्रतिमा को स्नान करवाएं और उन्हें साफ धुले हुए वस्त्र पहनाएं।
  • भगवान विष्णु की विधि- विधान से पूजा करें।
  • भगवान की आरती करें।
  • वरुथिनी एकादशी के दिन भगवान विष्णु को भोग अवश्य लगवाएं।
  • द्वादशी तिथि के दिन व्रत खोलें
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वरुथिनी एकादशी 2021 - फोटो : अमर उजाला
वरुथिनी एकादशी व्रत की कथा
नर्मदा नदी के तट पर मान्धाता नामक राजा राज करता था। राजा की रुचि हमेशा धार्मिक कार्यों में रहती थी। वह हमेशा पूजा-पाठ में लीन रहते था। एक बार राजा जंगल में तपस्या में लीन था तभी एक जंगली भालू आया और राजा का पैर चबाने लगा। राजा इस घटना से तनिक भी भयभीत नहीं हुआ और भालू राजा के पैर को चबाते हुए घसीटकर ले जाने लगा। तब राजा मान्धाता ने अपनी रक्षा के लिए भगवान विष्णु से प्रार्थना की। राजा की पुकार सुनकर भगवान विष्णु प्रकट ने चक्र से भालू को मार डाला।

राजा का पैर भालू खा चुका था इसलिए राजा इस बात को लेकर बहुत परेशान हो गया। वहीं अपने दुखी भक्त को देखकर भगवान विष्णु बोले- 'हे वत्स! शोक मत करो। तुम मथुरा जाओ और वरुथिनी एकादशी का व्रत रखकर मेरी वराह अवतार मूर्ति की पूजा करो। उसके प्रभाव से पुन: सुदृढ़ अंगों वाले हो जाओगे। इस भालू ने तुम्हें जो काटा है, यह तुम्हारे पूर्व जन्म का अपराध था। भगवान की आज्ञा मानकर राजा ने मथुरा जाकर श्रद्धापूर्वक यह व्रत किया। इसके प्रभाव से वह सुंदर और संपूर्ण अंगों वाला हो गया।
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