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Vaishakh Amavasya 2021: कालसर्प दोष की मुक्ति के लिए सबसे अच्छी तिथि होती है अमावस्या

Tue, 11 May 2021 11:33 AM IST
रुस्तम राणा धर्म डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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वैशाख अमावस्या 2021 - फोटो : अमर उजाला
आज वैशाख अमावस्या तिथि है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, वैशाख अमावस्या को धर्म-कर्म, स्नान-दान और पितरों के तर्पण के लिए बहुत ही शुभ माना जाता है। कुंडली में बनने वाले काल सर्प दोष के अशुभ प्रभाव से मुक्ति पाने के लिए भी अमावस्या का दिन महत्वपूर्ण माना जाता है। 
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जब कुंडली में राहु और केतु के मध्य में सारे ग्रह आ जाते हैं तब कुंडली में कालसर्प दोष बनता है। - फोटो : सोशल मीडिया
कालसर्प दोष क्या है?
जब कुंडली में राहु और केतु के मध्य में सारे ग्रह आ जाते हैं तब कुंडली में कालसर्प दोष बनता है। कालसर्प दोष दो शब्दों को मिलाकर बना है। इसमें पहला शब्द है काल, यानि मृत्यु और दूसरा शब्द है - सर्प, जिसका तात्पर्य सांप से है। कुंडली में कालसर्प दोष के प्रभाव से व्यक्ति को मानसिक कष्ट सहना पड़ता है। इसके साथ ही कई तरह की परेशानियां जातकों को सहना पड़ता है।  
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कुंडली में काल सर्प दोष - फोटो : सोशल मीडिया
अमावस्या तिथि और कालसर्प दोष
वैशाख अमावस्या के दिन कालसर्प दोष के प्रभाव को कम करने के लिए कुछ विशेष ज्योतिषीय उपाय किए जाते हैं। इसके दुष्प्रभाव से व्यक्ति को धन का अभाव, संतान की हानि, दांपत्य सुख में बाधा, आजीविका में बाधा, कारागार का भय, स्वजनों से त्याग, अकाल मृत्यु आदि का भय रहता है।

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राहु और केतु - फोटो : सोशल मीडिया
काल सर्पयोग का प्रभाव कब होता है?
  • जब राहु की महादशा, अंतर्दशा या प्रत्यंतर्दशा आती है।  
  • जब भी गोचर वशात् राहु अशुभ चलता हो।
  • जब भी गोचर से कालसर्प योग की श्रृष्टि हो।
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अमावस्या के दिन भगवान शिव की आराधना करें। - फोटो : Social media
अमावस्या के दिन करें ये उपाय
इस दोष से मुक्ति के लिए वैशाख अमावस्या के पावन दिन विधि-विधान से भगवान शिव की पूजा-अर्चना करनी चाहिए। इस दिन दूध, गंगा जल, इत्यादि से भोलेनाथ का अभिषेक करें। भोलेनाथ को भोग भी लगाएं और उनकी आरती करें। भगवान शिव की पूजा- अर्चना करने से कालसर्प दोष से मुक्ति मिल सकती है।
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अमावस्या के दिन शिवजी का रूद्राभिषेक कर नौ प्रकार के नागों की प्रतिमा बना उनको नदी में प्रवाहित करना चाहिए। - फोटो : अमर उजाला
नाग देवता की करें पूजा
कालसर्प दोष दूर करने के लिए जातकों को मंदिरों में सोना, चांदी, तांबा, पीतल के नाग-नागिनों के जोड़े बनाकर चढ़ाने चाहिए। अमावस्या या नाग पंचमी के दिन शिवजी का रूद्राभिषेक कर नौ प्रकार के नागों की प्रतिमा बना उनको नदी में प्रवाहित करना चाहिए। नागों को प्रवाहित करने के बाद स्नान करें। पहने हुए वस्त्रों का त्याग करें। नवीन वस्त्र धारण करने का विधान है। नाग स्त्रोत का पाठ करें।
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