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Vaikuntha Chaturdashi 2020: भगवान शिव ने दिया था विष्णुजी को सुदर्शन चक्र, जानिए वैकुण्ठ चतुर्दशी का महत्व

Tue, 24 Nov 2020 07:04 AM IST
Shashi Shashi धर्म डेस्क, अमर उजाला
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वैकुंठ चतुर्दशी 2020 - फोटो : Social Media
कार्तिक मास की शुक्ल पक्ष की चतुर्दशी तिथि को ''वैकुंठ चतुर्दशी'' मनाई जाती है। इस बार वैकुंठ चतुर्दशी 29 नवंबर को पड़ रही है। इस दिन वैकुंठ के आधिपति भगवान विष्णु की पूजा-आराधना करने का विधान है। यह दिन भगवान शिव और विष्णु जी के मिलन को दर्शाता है, इसलिए वैकुंठ चतुर्दशी को हरिहर का मिलन भी कहा जाता है। इस दिन विष्णु जी की कमल के फूलों से पूजा करनी चाहिए साथ ही भगवान शिव की पूजा भी करनी चाहिए। इस दिन भगवान विष्णु की पूजा अर्चना करने से वैकुंठ धाम की प्राप्ति होती है। जानते हैं वैकुंठ चतुर्दशी की कथा और व्रत का विधान...

 
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वैकुंठ चतुर्दशी 2020 (प्रतीकात्मक तस्वीर)
कथा के अनुसार एक बार भगवान विष्णु शिव जी का दर्शन करने महादेव की नगरी काशी में आए। उसके बाद उन्होंने मणिकर्णिका घाट पर स्नान करने के पश्चात एक हजार स्वर्ण कमलों से शिव जी का पूजन करने का संकल्प लिया। विष्णु जी की परीक्षा लेने के उद्देश्य से शिव जी ने उन स्वर्ण कमलों में से एक कमल कम कर दिया। तब उस कमल की पूर्ति करने के लिए विष्णु जी ने अपने नयन कमल शिव जी को अर्पित करने का विचार किया। जैसे ही विष्णु जी अपने नयन अर्पित करने को तत्पर हुए, शिव जी प्रकट हो गए। उन्होंने विष्णु जी से कहा कि आपके समान मेरा कोई भक्त नहीं है। तब शिव जी ने कहा की आज से कार्तिक मास की चतुर्दशी वैकुंठ चतुर्दशी के नाम से जानी जाएगी। विष्णु जी की भक्ति से प्रसन्न होकर शिव जी ने उन्हें सुदर्शन चक्र प्रदान किया। 
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वैकुंठ चतुर्दशी 2020 (प्रतीकात्मक तस्वीर)
वैकुंठ चतुर्दशी व्रत की तिथि
चतुर्दशी तिथि आरंभ- 28 नवंबर 2020 सुबह 10 बजकर 26 मिनट से
चतुर्दशी तिथि समाप्त-29 नवंबर 2020 दोपहर 12 बजकर 33 मिनट तक
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lord vishnu
व्रत का विधान-
वैकुंठ चतुर्दशी को प्रातःकाल स्नानदि करके स्वच्छ वस्त्र धारण करें। भगवान के समक्ष व्रत का संकल्प करें और पूरे दिन व्रत करें। रात्रि के समय कमल के पुष्पों से भगवान विष्णु की पूजन करें। तत्पश्चात भगवान शिव का विधि-विधान के साथ पूजन करें। दूसरे दिन प्रातः उठकर शिव जी का पूजन करके जरुरतमंदो को भोजन करवाएं और व्रत का पारण करें। 




 
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