नवरात्र में अक्सर घटस्थापना और अखंड ज्योति को मां दुर्गा की चौकी के सामने ही रख देते हैं और पूरे नौ दिन वहीं पर पूजा करते हैं। नवरात्र में घटस्थापना और अखंड ज्योति का अपना अलग ही महत्व हैं। लेकिन अगर इसे वास्तु नियमों के अनुसार जगह दी जाए तो फल भी उतना ही मिलता हैं।
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घटस्थापना
- उत्तर- पूर्व यानि ईशान कोण को देवी- देवताओं का स्थान माना गया हैं। इसी दिशा में माता की प्रतिमा और घट की स्थापना करना शुभ होता हैं।
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कलश को नीचे जमीन पर ना रखें
- कलश को नीचे जमीन पर ना रखें। बल्कि इसकी स्थापना चंदन के पटिए पर करें। यह बहुत ही शुभ माना जाता हैं। साथ ही ध्यान रखें कि पूजा वाली जगह के ऊपर कोई गंदे कपड़े आदि पड़े हुए ना हो।
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ध्वजा
- नवरात्र में समय कुछ लोग अपने घर पर लगे ध्वजा को भी बदलते हैं। इस बार ध्वजा बदलते हुए उसकी दिशा को ध्यान में जरूर रखें। घर की छत पर उत्तर पश्चिम कोने पर ही ध्वजा लगाएं।
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माता की प्रतिमा
- जिस जगह पर माता की प्रतिमा को स्थापित किया गया हैं, वहां के आस पास की जगह को थोड़ा खुला रखें।
- अगर आपने नवरात्र में अखंड ज्योति जलाने का संकल्प लिया हैं तो इसे गलत दिशा में ना रखें। अखंड ज्योति पूर्व- दक्षिण कोण यानि आग्नेय कोण में ही रखने पर शुभ होता हैं। ध्यान रहें पूजा के समय इसका मुंह पूर्व या फिर उत्तर दिशा में होना चाहिए।