फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

कार्यों में सफलता प्राप्ति के लिए बुधवार को करें गणेश चालीसा का पाठ, मिलेंगे अच्छे परिणाम

Wed, 23 Apr 2025 06:33 AM IST
मेघा कुमारी धर्म डेस्क, अमर उजाला

सार

Powerful Astrological Remedies for Success: हिंदू धर्म में रोजाना भगवान गणेश की उपासना की जाती है, जिसके प्रभाव से जीवन में सुख-समृद्धि व खुशियों का वास होता है। 
विज्ञापन
1 of 5
हिंदू धर्म में रोजाना भगवान गणेश की उपासना की जाती है, जिसके प्रभाव से जीवन में सुख-समृद्धि व खुशियों का वास होता है। - फोटो : freepik
Powerful Astrological Remedies for Success: हिंदू धर्म में रोजाना भगवान गणेश की उपासना की जाती है, जिसके प्रभाव से जीवन में सुख-समृद्धि व खुशियों का वास होता है। शास्त्रों में प्रभु को प्रथम पूज्य देवता का स्थान प्राप्त है और वह भक्तों की सभी "विघ्न बाधाएं" दूर करते हुए सभी पर अपनी कृपा बरसाते हैं। हालांकि गजानन का विशेष आशीर्वाद पाने के लिए बुधवार सबसे उत्तम दिन है।

कहते हैं कि अगर इस दिन उन्हें केवल मोदक का भोग लगाया जाए, तो वह प्रसन्न होते हैं। वहीं भक्तों की सभी इच्छाएं भी पूरी करते हैं। गणेश जी बुद्धि और विवेक के देवता भी हैं और उनके आशीर्वाद से ज्ञान और समझ बढ़ती हैं। इसलिए छात्रों को प्रभु की पूजा अवश्य करनी चाहिए। इससे करियर में सफलता और शिक्षा क्षेत्र में मनचाहे परिणाम मिलते हैं। इस दौरान गणेश चालीसा और मंत्रों का जाप करने से जीवन में तरक्की के योग बनते हैं। ऐसे में आइए इस चालीसा और मंत्र के बारे में जानते है..
विज्ञापन

2 of 5
student Success Remedies - फोटो : freepik
इन मंत्रों का करें जाप 

1. 
वक्रतुण्ड महाकाय सूर्यकोटि समप्रभ ।
निर्विघ्नं कुरु मे देव सर्वकार्येषु सर्वदा ॥

 
विज्ञापन

3 of 5
student Success Remedies - फोटो : freepik
2. गणपूज्यो वक्रतुण्ड एकदंष्ट्री त्रियम्बक:।
नीलग्रीवो लम्बोदरो विकटो विघ्रराजक :।।
धूम्रवर्णों भालचन्द्रो दशमस्तु विनायक:।
गणपर्तिहस्तिमुखो द्वादशारे यजेद्गणम।।

4 of 5
student Success Remedies - फोटो : freepik
3. गजाननाय पूर्णाय साङ्ख्यरूपमयाय ते ।
विदेहेन च सर्वत्र संस्थिताय नमो नमः ॥
 
विज्ञापन
विज्ञापन

5 of 5
student Success Remedies - फोटो : freepik
श्री गणेश जी की चालीसा

दोहा
जय गणपति सदगुणसदन, कविवर बदन कृपाल।
विघ्न हरण मंगल करण, जय जय गिरिजालाल॥

चौपाई
जय जय जय गणपति गणराजू।
मंगल भरण करण शुभ काजू॥
जय गजबदन सदन सुखदाता।
विश्व विनायक बुद्घि विधाता॥
वक्र तुण्ड शुचि शुण्ड सुहावन।
तिलक त्रिपुण्ड भाल मन भावन॥
राजत मणि मुक्तन उर माला।
स्वर्ण मुकुट शिर नयन विशाला॥
पुस्तक पाणि कुठार त्रिशूलं।
मोदक भोग सुगन्धित फूलं॥
सुन्दर पीताम्बर तन साजित।
चरण पादुका मुनि मन राजित॥
धनि शिवसुवन षडानन भ्राता।
गौरी ललन विश्व-विख्याता॥
ऋद्धि-सिद्धि तव चंवर सुधारे।
मूषक वाहन सोहत द्घारे॥
कहौ जन्म शुभ-कथा तुम्हारी।
अति शुचि पावन मंगलकारी॥
एक समय गिरिराज कुमारी।
पुत्र हेतु तप कीन्हो भारी॥
भयो यज्ञ जब पूर्ण अनूपा।
तब पहुंच्यो तुम धरि द्घिज रुपा॥
अतिथि जानि कै गौरि सुखारी।
बहुविधि सेवा करी तुम्हारी॥
अति प्रसन्न है तुम वर दीन्हा।
मातु पुत्र हित जो तप कीन्हा॥
मिलहि पुत्र तुहि, बुद्धि विशाला।
बिना गर्भ धारण, यहि काला॥
गणनायक, गुण ज्ञान निधाना।
पूजित प्रथम, रुप भगवाना॥
अस कहि अन्तर्धान रुप है।
पलना पर बालक स्वरुप है॥
बनि शिशु, रुदन जबहिं तुम ठाना।
लखि मुख सुख नहिं गौरि समाना॥
सकल मगन, सुखमंगल गावहिं।
नभ ते सुरन, सुमन वर्षावहिं॥
शम्भु, उमा, बहु दान लुटावहिं।
सुर मुनिजन, सुत देखन आवहिं॥
लखि अति आनन्द मंगल साजा।
देखन भी आये शनि राजा॥
निज अवगुण गुनि शनि मन माहीं।
बालक, देखन चाहत नाहीं॥
गिरिजा कछु मन भेद बढ़ायो।
उत्सव मोर, न शनि तुहि भायो॥
कहन लगे शनि, मन सकुचाई।
का करिहौ, शिशु मोहि दिखाई॥
नहिं विश्वास, उमा उर भयऊ।
शनि सों बालक देखन कहाऊ॥
पडतहिं, शनि दृग कोण प्रकाशा।
बोलक सिर उड़ि गयो अकाशा॥
गिरिजा गिरीं विकल हुए धरणी।
सो दुख दशा गयो नहीं वरणी॥
हाहाकार मच्यो कैलाशा।
शनि कीन्हो लखि सुत को नाशा॥
तुरत गरुड़ चढ़ि विष्णु सिधायो।
काटि चक्र सो गज शिर लाये॥
बालक के धड़ ऊपर धारयो।
प्राण, मंत्र पढ़ि शंकर डारयो॥
नाम गणेश शम्भु तब कीन्हे।
प्रथम पूज्य बुद्धि निधि, वन दीन्हे॥
बुद्धि परीक्षा जब शिव कीन्हा।
पृथ्वी कर प्रदक्षिणा लीन्हा॥
चले षडानन, भरमि भुलाई।
रचे बैठ तुम बुद्घि उपाई॥
धनि गणेश कहि शिव हिय हरषे।
नभ ते सुरन सुमन बहु बरसे॥
चरण मातु-पितु के धर लीन्हें।
तिनके सात प्रदक्षिण कीन्हें॥
तुम्हरी महिमा बुद्धि बड़ाई।
शेष सहसमुख सके न गाई॥
मैं मतिहीन मलीन दुखारी।
करहुं कौन विधि विनय तुम्हारी॥
भजत रामसुन्दर प्रभुदासा।
जग प्रयाग, ककरा, दुर्वासा॥
अब प्रभु दया दीन पर कीजै।
अपनी भक्ति शक्ति कछु दीजै॥
श्री गणेश यह चालीसा।
पाठ करै कर ध्यान॥
नित नव मंगल गृह बसै।
लहे जगत सन्मान॥

दोहा
सम्वत अपन सहस्त्र दश, ऋषि पंचमी दिनेश।
पूरण चालीसा भयो, मंगल मूर्ति गणेश॥

Chanakya Niti: जीवन भर काम आएंगी ये बातें, जिन्हें चाणक्य ने सदियों पहले बता दिया था

डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): ये लेख लोक मान्यताओं पर आधारित है। यहां दी गई सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है।
 
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें