महाभारत के महायोद्धा कर्ण के जीवन की एक कहानी ऐसी है जिसके बारे में कम ही लोग जानते हैं, यह कहानी है कर्ण के विवाह की।
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महाभारत के महावीर कर्ण की शादी से जुड़ा यह राज नहीं जानते होंगे
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कर्ण सूर्य के पुत्र थे। लेकिन दुर्भाग्य से इनकी माता कुंती ने इन्हें जन्म लेते ही गंगा में प्रवाहित कर दिया और वह अधिरथ के घर में पले बढ़े। इस कारण से कर्ण को जीवन में कई बार समझौता करना पड़ा और इसका असर इनके वैवाहिक जीवन पर भी पड़ा।
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महाभारत के महावीर कर्ण की शादी से जुड़ा यह राज नहीं जानते होंगे
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महाभारत में ऐसी कथा है कि दुर्योधन ने कर्ण को अपन मित्र बनाकर अंग देश का राजा बना दिया। इसलिए जब द्रौपदी के विवाह के लिए जब देश भर से राजे महाराजे पहुंचे तो उनके साथ कर्ण भी आया। कर्ण भी द्रौपदी के विवाह की शर्त को पूरी करके द्रौपदी से विवाह करना चाहते थे।
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लेकिन कर्ण की यह चाहत नहीं हो सकी क्योंकि उसे सूत पुत्र होने के कारण प्रतियोगिता में भाग नहीं लेने दिया गया। इस बात से कर्ण बहुत दुःखी हुआ लेकिन इसके बाद कर्ण के जीवन में दो कन्या आई यानी कर्ण ने दो विवाह किए।
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कर्ण की पहली पत्नी थी रुषाली। यह सूत कन्या थी। पिता की इच्छा का मान रखते हुए कर्ण ने रुषाली से विवाह किया था। इसके बाद कर्ण ने एक और विवाह किया जिसका नाम था सुप्रिया। इन दोनों पत्नियों से कर्ण को नौ पुत्र प्राप्त हुए।
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महाभारत के युद्ध में कर्ण के सभी पुत्रों ने भाग लिया था इनमें से एक पुत्र जिसका नाम वृषकेतु था वह जीवित बचा। ऐसी कथा है कि जब पांडवों को कर्ण के बारे में यह बात पता चली कि वह उनका ही भाई था तब युधिष्ठिर ने कर्ण के पुत्र को इन्द्रप्रस्थ का राज दे दिया।