फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Somvati Amavasya 2026: 15 जून को बन रहा दुर्लभ शुभ योग, जानें पितृ तर्पण, दान और गौ सेवा का महत्व

Sat, 13 Jun 2026 01:33 PM IST
Shweta Singh ज्योतिष डेस्क, अमर उजाला

सार

15 जून 2026 सोमवती अमावस्या का महत्व, शुभ योग, मृगशिरा नक्षत्र, सर्वार्थ सिद्धि योग और अमृत सिद्धि योग के साथ पूजा, दान और पितृ तर्पण की जानकारी पढ़ें।
विज्ञापन
1 of 7
क्यों खास है इस बार की सोमवती अमावस्या? - फोटो : Amar Ujala

Somvati Amavasya: 15 जून 2026, सोमवार को ज्येष्ठ (अधिक) मास की अमावस्या पड़ रही है, जिसे सोमवती अमावस्या कहा जाता है। सोमवार के दिन अमावस्या होने के कारण इसका धार्मिक महत्व और भी बढ़ जाता है। सनातन धर्म में इस दिन पूजा-पाठ, दान और पितरों के तर्पण का विशेष महत्व बताया गया है। इस बार ग्रह-नक्षत्रों की स्थिति बेहद शुभ मानी जा रही है, जिससे यह अमावस्या और भी फलदायी बन जाती है। मृगशिरा नक्षत्र, सर्वार्थ सिद्धि योग और अमृत सिद्धि योग जैसे शुभ संयोग इस दिन को अत्यंत विशेष बना रहे हैं।
गजकेसरी राजयोग; कन्या, तुला और धनु राशि वालों को मिलेंगे अपार धन-दौलत के मौके और पूरी होंगी इच्छाएं
धन को आकर्षित करने वाला पर्स: फेंगशुई और वास्तु के अनुसार किन चीजों को रखें दूर और किसे रखे साथ

विज्ञापन

2 of 7
अमावस्या तिथि और समय - फोटो : adobe stock

अमावस्या तिथि और समय
पंचांग के अनुसार अमावस्या तिथि 14 जून 2026 को मध्यरात्रि 12 बजकर 20 मिनट से शुरू होकर 15 जून 2026 को सुबह 8 बजकर 24 मिनट तक रहेगी।
उदयातिथि के अनुसार सोमवती अमावस्या का व्रत और पूजन 15 जून को ही किया जाएगा।

विज्ञापन

3 of 7
ग्रहों की स्थिति और महत्व - फोटो : adobe stock

ग्रहों की स्थिति और महत्व
ज्योतिषीय गणना के अनुसार इस दिन कई प्रमुख ग्रह शुभ एवं मजबूत स्थिति में रहेंगे। चंद्रमा वृषभ राशि में स्थित रहेंगे, जो उनकी उच्च राशि मानी जाती है। बुध ग्रह अपनी स्वराशि मिथुन में रहेंगे, गुरु कर्क राशि में स्थित रहेंगे और मंगल ग्रह मेष राशि में विद्यमान रहेंगे। इन अनुकूल ग्रह स्थितियों के कारण यह दिन आध्यात्मिक, धार्मिक और सकारात्मक ऊर्जा की दृष्टि से अत्यंत प्रभावशाली माना जा रहा है।

4 of 7
मृगशिरा नक्षत्र के साथ सर्वार्थ सिद्धि और अमृत सिद्धि योग का शुभ संयोग बन रहा है। - फोटो : adobe

विशेष योग और नक्षत्र
इस दिन मृगशिरा नक्षत्र का संयोग बन रहा है, जो शुभ कार्यों के लिए अनुकूल माना जाता है। इसके साथ ही सर्वार्थ सिद्धि योग और अमृत सिद्धि योग का भी निर्माण हो रहा है। ये दोनों योग पूजा-पाठ, ध्यान, साधना, दान-पुण्य और धार्मिक कार्यों के लिए अत्यंत शुभ और फलदायी माने जाते हैं, जिससे इस दिन का महत्व और अधिक बढ़ जाता है।

विज्ञापन

5 of 7
सोमवती अमावस्या पर पीपल वृक्ष और पूजा का महत्व - फोटो : adobe

सोमवती अमावस्या पर पीपल वृक्ष और पूजा का महत्व
सोमवती अमावस्या के दिन पीपल वृक्ष की पूजा करने की विशेष परंपरा है, क्योंकि इसे भगवान विष्णु का प्रतीक एवं निवास माना जाता है। इस दिन महिलाएं अपने परिवार की सुख-समृद्धि और लंबी आयु की कामना के लिए पीपल वृक्ष की 108 परिक्रमा करती हैं। इसके साथ ही तुलसी, बेलपत्र और शमी के पौधों की पूजा करना भी अत्यंत शुभ माना जाता है। संध्या के समय दीपदान करने से नकारात्मक ऊर्जा का नाश होता है और जीवन में सौभाग्य एवं सकारात्मकता में वृद्धि होती है।

विज्ञापन

6 of 7
अमावस्या तिथि को पितरों की स्मृति के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण माना गया है। - फोटो : adobe stock

पितरों का तर्पण और दान का महत्व
अमावस्या तिथि को पितरों की स्मृति के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण माना गया है। इस दिन तर्पण, श्राद्ध और दान-पुण्य करने से पितरों का आशीर्वाद प्राप्त होता है। लोग इस दिन जल में काले तिल मिलाकर तर्पण करते हैं और दीपदान भी करते हैं, जिससे पितृ दोष की शांति और जीवन में सुख-समृद्धि का मार्ग प्रशस्त होता है।

विज्ञापन
विज्ञापन

7 of 7
गौ सेवा करते अरविंद स्वामी जोशी - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी

गौ सेवा और धार्मिक कार्य
इस दिन गौ सेवा का विशेष महत्व बताया गया है। गाय को चारा खिलाना और पक्षियों के लिए दाना-पानी की व्यवस्था करना अत्यंत पुण्यकारी माना जाता है। इससे जीवन में सकारात्मक ऊर्जा बढ़ती है और शुभ फलों की प्राप्ति होती है।


डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): यहां दी गई जानकारी सामान्य मान्यताओं, ज्योतिष, पंचांग, धार्मिक ग्रंथों आदि पर आधारित है। यहां दी गई सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है। 

विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें